मान्यता : दर्शन मात्र से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, अंतिम सोमवार को लगता है विशाल मेला
FATEHPUR NEWS: (शीबू खान/धीर सिंह यादव) सावन मास में शिवभक्ति अपने चरम पर है। जिले के बिंदकी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत जहानाबाद कस्बे से लगभग एक किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व दिशा में पूरनपुर मोहल्ला स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री राजराजेश्वर धाम (बाड़े बाबा) इन दिनों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पूरे सावन माह में यहां प्रतिदिन सुबह से देर शाम तक भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। जनपद के अलावा कानपुर, हमीरपुर, बांदा, उन्नाव समेत आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में शिवभक्त मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
सैकड़ों वर्ष पुराने इस प्राचीन मंदिर में स्थापित विशालकाय शिवलिंग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। मान्यता है कि बाबा राजराजेश्वर के दरबार में सच्चे मन से आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि सावन मास के साथ-साथ महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों पर भी यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं आज भी लोगों की आस्था का आधार हैं। बताया जाता है कि प्रतिदिन रात्रि में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन प्रातःकाल जब मंदिर खोला जाता है तो शिवलिंग पर अक्षत, चंदन और पुष्प चढ़े हुए मिलते हैं। श्रद्धालु इसे बाबा की दिव्य महिमा और अलौकिक शक्ति से जोड़कर देखते हैं। इसी विश्वास के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में धार्मिक आयोजनों की भी विशेष परंपरा है। सावन मास के तीसरे सोमवार से यहां शिवपुराण कथा का शुभारंभ होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। वहीं सावन के अंतिम सोमवार को विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में फतेहपुर के अलावा आसपास के जनपदों से हजारों श्रद्धालु पहुंचकर भगवान शिव का दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्पों से जलाभिषेक करते हैं। पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान रहता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का आयोजन होता है। सैकड़ों कांवड़िये पवित्र नदियों से जल लेकर यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं समाजसेवियों द्वारा भंडारे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाती है। मेले के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहता है। मंदिर परिसर की प्राकृतिक सुंदरता भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। परिसर में संतों और स्थानीय भक्तों द्वारा लगाए गए विभिन्न प्रकार के छायादार एवं धार्मिक महत्व वाले वृक्ष वातावरण को शांत और आध्यात्मिक बनाते हैं। मंदिर के समीप स्थित विशाल तालाब इसकी सुंदरता में चार चांद लगाता है, जिससे यह पूरा परिसर अत्यंत रमणीय और मनमोहक दिखाई देता है। मंदिर परिसर में बने प्राचीन चबूतरे को लेकर भी लोगों में गहरी आस्था है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस चबूतरे पर छोटे बच्चों को लिटाने से सूखा रोग से राहत मिलती है। इसी विश्वास के चलते आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी लोग अपने बच्चों को लेकर यहां पहुंचते हैं। मंदिर के महंत गोपालानंद जी महाराज ने बताया कि श्री राजराजेश्वर धाम में स्थापित बाबा भोलेनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा के दर्शन मात्र से ही मन की मुरादें पूरी हो जाती हैं। यही कारण है कि फतेहपुर के अलावा कानपुर, हमीरपुर, बांदा, उन्नाव सहित कई जिलों से लोग नियमित रूप से यहां दर्शन करने आते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में घंटा चढ़ाकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। सावन के पावन अवसर पर यह सिद्धपीठ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का भी प्रमुख प्रतीक है। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा राजराजेश्वर के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
मंदिर तक पहुंचने का मार्ग
सिद्धपीठ राजराजेश्वर धाम जहानाबाद कस्बे से लगभग एक किलोमीटर दूर पूरनपुर मोहल्ले के समीप स्थित है। जहानाबाद-अमौली मार्ग पर स्थित बिजली उपकेंद्र के पास से कोड़ा माइनर की बंबा पटरी पर बने सीसी मार्ग से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा पूरनपुर मोहल्ले के मुख्य मार्ग से भी श्रद्धालु सीधे मंदिर पहुंच सकते हैं।







