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सदका-ए-फित्र न देने से जमीं और आसमान के बीच में लटका रहता है ष्रोजाष् सदका देने में करें जल्दी

VARANASI NEWS: सदका-ए-फित्र ईद की नमाज से पहले हर हाल में मोमिनीन अदा कर दे ताकि उसका रोजा रब की बारगाह में कुबुल हो जाये, अगर नहीं दिया तो तब तक उसका रोजा जमीन और आसमान के दरमियान लटका रहेगा जब तक सदका-ए-फित्र अदा नहीं कर देता। हिजरी कलैंडर का 9 वां महीना रमजान वो महीना जिसके आते ही जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते हैं और रब जहन्नुम के दरवाजे बंद कर देता हैं। फिजा में चारों ओर नूर छा जाता है।मस्जिदें नमाजियों से भर जाती हैं। लोगों के दिलों दिमाग में बस एक ही बात रहती है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा सवाब क्या लिया जाये। एक महीने की तो बात है। इसलिए फर्ज नमाजों के साथ ही नफ्ल और तहज्जुद पर जोर रहता है, अमीर गरीबों का हक अदा करता हैं। पता ये चला कि रमजान हमे जहां नेकी की राह दिखाता है वही यह मुकद्दस महीना गरीबो, मिसकीनों, लाचारों, बेवा, और बेसहरा वगैरह को उनका हक़ और अधिकार भी देता है। यही वजह है कि रमजान का आखिरी अशरा आते आते हर साहिबे निसाब अपनी आमदनी की बचत का ढ़ाई फीसद जक़ात निकालता है तो दो किलों 45 ग्राम वो गेंहू जो वो खाता है उसका फितरा। रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीके से तो गुजारता ही है, एक महीना माहे रमजान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। यही वजह है कि इस महीने को इबादत वाला महीना भी कहते हैं। रब कहता है कि माहे रमजान कितना अजीम बरकतों और रहमतो का महीना है इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि इस पाक महीने में कुरान शरीफ नाजिल हुई। इस महीने में बंदा दुनिया की तमाम ख्वाहिशात को मिटा कर अपने रब के लिए पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर रोजा रखता है। नमाजे अदा करता है। के अलावा तहज्जुद, चाश्त, नफ्ल अदा करता है इस महीने में वो मजहबी टैक्स जकात और फितरा देकर गरीबों-मिसकीनों की ईद कराता है।अल्लाह ने हदीस में फरमया है कि सिवाए रोजे के कि रोजा मेरे लिये है इसकी जजा मैं खुद दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। यह महीना नेकी का महीना है इस महीने से इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रोजा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे ..आमीन।