KAUSHAMBI NEWS: संतुलित उर्वरक प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन अभियान के तहत विकास खंड मंझनपुर के ग्राम गुजारा तैयबपुर में एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी देना रहा। कृषि विज्ञान केंद्र, कौशांबी के मृदा वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि असंतुलित उर्वरक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि सिफारिश आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग से जहां फसल उत्पादन बढ़ता है, वहीं मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी।
डॉ. सिंह ने हरी खाद (ढैंचा) के उपयोग के फायदे बताते हुए कहा कि इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है और लगभग 60 से 70 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन की पूर्ति होती है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। उन्होंने फास्फोरस की पूर्ति के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के प्रयोग की भी सलाह दी और बताया कि इसमें सल्फर व कैल्शियम भी मौजूद होते हैं, जो फसलों की वृद्धि के लिए जरूरी हैं। उप कृषि निदेशक सतेन्द्र तिवारी ने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप उर्वरकों का प्रयोग करें, जिससे लागत कम होने के साथ उत्पादन में वृद्धि संभव हो सके। उन्होंने विभागीय योजनाओं की जानकारी भी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में एसएमएस नीरज कुमार तिवारी, स्वर्ण सिंह एवं बीज गोदाम प्रभारी ने भी किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों और बीज प्रबंधन की जानकारी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।







