PRATAPGARH NEWS: लालगंज तहसील सभागार मे सोमवार को शिक्षाविद् एवं नगर स्थित बहुगुणा पीजी कालेज के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. गिरिजा शंकर शुक्ल की बीसवीं पुण्यतिथि समारोहपूर्वक मनाई गयी। कार्यक्रम की शुरूआत तहसीलदार गरिमा वर्मा व संयुक्त अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी महेश के द्वारा प्रो. शुक्ल के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। संयुक्त अधिवक्ता संघ के तत्वाधान मे आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्यअतिथि संबोधित करते हुए तहसीलदार गरिमा वर्मा ने कहा कि शैक्षिक गुणवत्ता व ज्ञानार्जन के क्षेत्र में प्रो0 गिरिजाशंकर के सिद्धांत अमूल्य रहा है। उन्होने कहा कि प्रो. शुक्ल ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र मंे स्नातक एवं परास्नातक मेधावियों को हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में अभिरूचि पैदा करने में सफलता दिलायी। उन्होनें प्रो. शुक्ल के सादगी भरे व्यक्तित्व तथा हिन्दी एवं शिक्षा के क्षेत्र में विषय पारंगता को भी शिक्षक कर्तव्य की प्रेरणा कहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संयुक्त अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी महेश ने कहा कि प्रो. शुक्ल के व्यक्तित्व मे समाजवाद तथा स्पष्ट अभिव्यक्ति की मिली प्रेरणा हमारा सदैव मार्गदर्शन करती रहेगी। प्रारम्भ मे प्रो. शुक्ल के व्यक्तित्व का विषय प्रवर्तन उनके कनिष्ठ पुत्र एवं रूरल बार के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने किया। प्रो. शुक्ल के ज्येष्ठ पुत्र एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के सैन्य विज्ञान विभागाध्यक्ष डा. ओपी शुक्ला ने वर्चुअल संबोधन के जरिए स्वागत भाषण किया। संचालन पूर्व अध्यक्ष विकास मिश्र व संयोजन संघ के पूर्व अध्यक्ष बेनीलाल शुक्ल एवं पूर्व उपाध्यक्ष विपिन शुक्ल ने किया। आभार प्रदर्शन संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अम्बुज पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व अध्यक्ष राव वीरेन्द्र सिंह, राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, कालिका प्रसाद पाण्डेय, टीपी यादव, कमलेश तिवारी, बृजेन्द्र तिवारी मण्टू ने भी प्रो. गिरिजाशंकर के शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। अधिवक्ता अनूप पाण्डेय ने काव्यपाठ कर समारोह को ऊंचाईयां प्रदान की। रूरल बार के तहसील अध्यक्ष सुमित त्रिपाठी व विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सत्येन्द्र श्रीवास्तव ने सह संयोजन किया। इस मौके पर स्वामी करपात्री सेवा संस्थान के सचिव राकेश त्रिपाठी, रवीन्द्र नाथ तिवारी, शैलेन्द्र मिश्र, शिव नारायण शुक्ल, नामवर सिंह, दीपेन्द्र तिवारी, राजेन्द्र त्रिपाठी, रामकिंकर शुक्ल, विभाकर शुक्ला, सुधाकर मिश्र, प्रभाकर पाल, शैलेन्द्र शुक्ल, मनीष क्रांतिकारी, अमरनाथ यादव, विनय शुक्ल, घनश्याम सरोज, राकेश सिंह, पारसनाथ सरोज, प्रभात श्रीवास्तव, मुरलीधर तिवारी आदि रहे।
Home उत्तर प्रदेश शैक्षिक गुणवत्ता व ज्ञानार्जन के क्षेत्र में प्रो0 गिरिजाशंकर के सिद्धांत अमूल्य:तहसीलदार







