परम पूज्य ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य
स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के अधिवक्ता ने मेला प्राधिकरण द्वारा दी गई नोटिस का जवाब देते हुए चेतावनी दी । एडवोकेट अंजनी कुमार मिश्रा ने प्रयागराज मेला विकास प्राधिकरण को यह चेतावनी देते हुए कहां है कि अगर वह 24 घंटे के अंदर 19 जनवरी 2026 को दिए गए नोटिस को वापस नहीं लेते हैं तो उनके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अब मानहानि याचिका एवं अन्य आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रति उत्तर का ट्रांसलेट..
प्रेषक:
अंजनि कुमार मिश्रा
एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली
प्रति:
उपाध्यक्ष
प्रयागराज मेला प्राधिकरण
माघ मेला, प्रयागराज
दिनांक: 20.01.2026
विषय:
आपका पत्र संख्या 4907/15 – M.K.M. (2025-26), दिनांक 19 जनवरी 2026 के संदर्भ में, जो मेरे मुवक्किल को आधी रात में उनके सोते समय माघ मेला शिविर के प्रवेश द्वार पर चस्पा कर तामील किया गया।
मेरे मुवक्किल का विवरण
परम पूज्य
ज्योतिषपीठाधीश्वर
जगद्गुरु शंकराचार्य
स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’
ज्योतिर्मठ, बदरिकाश्रम, हिमालय
उत्तराखंड
प्रारंभिक कथन
मेरे मुवक्किल के निर्देशानुसार और उनके विधिक प्रतिनिधि के रूप में, मैं आपके उपरोक्त पत्र का उत्तर दे रहा हूँ। यह उत्तर मेरे मुवक्किल के अन्य कानूनी, संवैधानिक और मौलिक अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए दिया जा रहा है।
मुख्य तथ्य (संक्षेप में)
1️⃣
आपका दिनांक 19.01.2026 का पत्र अधिकार क्षेत्र से बाहर, मनमाना, दुर्भावनापूर्ण, भेदभावपूर्ण तथा दुर्भावना से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य मेरे मुवक्किल को अपमानित करना और सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना है।
2️⃣
परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने
11.09.2022 को ब्रह्मलीन होने से पूर्व
एक पंजीकृत वसीयत (01.02.2017) एवं घोषणा पत्र के माध्यम से
मेरे मुवक्किल को ज्योतिषपीठ बदरिकाश्रम का उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।
3️⃣
12.09.2022 को वैदिक विधि-विधान, अभिषेक, चादर, मंत्रोच्चार आदि के साथ
लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में
मेरे मुवक्किल को विधिवत जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया।
4️⃣
इस वसीयत को चुनौती देने हेतु दायर याचिका
गुजरात हाईकोर्ट द्वारा 02.09.2025 को खारिज कर दी गई।
5️⃣
सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपीलों के दौरान
21.09.2022 को स्वयं न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि
मेरे मुवक्किल का पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका है,
जिसे न्यायालय ने अपने आदेश में दर्ज किया।
6️⃣
तीन अन्य पीठों —
शारदा मठ (द्वारका)
श्रृंगेरी मठ
गोवर्धन मठ (पुरी)
तथा भारत धर्म महामंडल ने भी
मेरे मुवक्किल की नियुक्ति का समर्थन किया।
7️⃣
मेरे मुवक्किल ने मानहानि का वाद
दिल्ली हाईकोर्ट में ₹10 करोड़ का दायर किया है,
जो वर्तमान में विचाराधीन है।
8️⃣
सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई भी प्रभावी स्थगन या निषेधाज्ञा
मेरे मुवक्किल के पद, उपाधि या अधिकारों पर वर्तमान में लागू नहीं है।
9️⃣
कुछ व्यक्तियों द्वारा झूठे, गढ़े हुए दस्तावेज प्रस्तुत कर
न्यायालय को भ्रमित करने का प्रयास किया गया,
जिसके विरुद्ध झूठी गवाही (Perjury) की कार्यवाही मांगी गई है।
🔟
2018 के सुप्रीम कोर्ट आदेश के अनुसार
ब्रह्मलीन शंकराचार्य के निधन के पश्चात
उनके द्वारा नामित उत्तराधिकारी ही
पीठ पर आसीन होने का अधिकारी होता है —
और वह मेरे मुवक्किल हैं।
आपके पत्र पर गंभीर आपत्तियाँ
आपका पत्र न्यायालय में विचाराधीन (Sub-judice) विषय में हस्तक्षेप करता है।
यह अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आता है।
इससे मेरे मुवक्किल की प्रतिष्ठा, सम्मान, आर्थिक एवं सामाजिक छवि को गंभीर क्षति पहुँची है।
मीडिया में भ्रम और अशांति फैलाई गई है।
⚠️ अंतिम चेतावनी / मांग
आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि आप
दिनांक 19.01.2026 का पत्र 24 घंटे के भीतर वापस लें,
अन्यथा मेरे मुवक्किल:
आपके विरुद्ध मानहानि
सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका
एवं अन्य आवश्यक कानूनी कार्यवाही
आरंभ करने के लिए बाध्य होंगे।
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
अंजनि कुमार मिश्रा
एडवोकेट
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया







