जमीनी हकीकत बदहाल, प्रधान और खंड विकास अधिकारी के दावे
SIDHARTHNAGAR NEWS: सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी विकास खंड के ग्राम पंचायत सिसवा बुजुर्ग में विकास योजनाओं की बदहाली और जिम्मेदारों की घोर लापरवाही ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। आजादी के सात दशकों बाद भी लगभग 4000 की आबादी वाला यह गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, जहां टूटी-फूटी सड़कें, कई जगह सड़कों पर बहता गंदा पानी और स्वच्छता अभियान की हवा-हवाई बातें जमीनी हकीकत को बयां कर रही हैं।
बदहाल सड़कें और स्वच्छता की चुनौती
सिसवा बुजुर्ग गांव की कई गलियों और मोहल्लों में पक्की सड़कें तो हैं, लेकिन वे इतनी टूटी-फूटी हैं कि उन पर चलना दूभर है। जल निकासी के लिए नालियां या तो हैं ही नहीं, या फिर सफाई के अभाव में पूरी तरह से चोक हो चुकी हैं, जिससे कई जगह गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और गांव में बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। बरसात के दिनों में इन सड़कों से गुजरना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। जगह-जगह कूड़े के ढेर स्वच्छता मिशन को मुंह चिढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सफाईकर्मी कभी-कभार ही आते हैं, न तो नियमित दवाओं का छिड़काव किया जाता है और न ही फॉगिंग होती है, जिससे मच्छरों का प्रकोप चरम पर है।
शौचालय, पंचायत भवन और आर.आर.सी. सेंटर पर ताला
स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने सामुदायिक शौचालय की स्थिति भी दयनीय है। ग्रामीणों ने बताया कि सामुदायिक शौचालय बनने के बाद से अधिकांश समय बंद ही रहता है। केवल अधिकारियों के दौरे के समय इसे खोलकर फोटो सेशन किया जाता है। केयरटेकर अर्चना पाण्डेय के पति ने फोन पर बताया कि मोटर खराब होने के कारण शौचालय बंद है, जबकि अन्य जिम्मेदार इसे सुबह-शाम खुलने की बात कहकर टालते नजर आए। सामुदायिक शौचालय तक जाने वाले रास्ते पर भी गंदगी का अंबार है और उसे शौच का स्थान बना लिया गया है।
इसी तरह, पंचायत भवन में भी अक्सर ताला लटका रहता है, जिससे ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र या अन्य कार्यों के लिए भटकना पड़ता है। पंचायत भवन के आसपास भी गंदगी फैली है और बगल में लगा सरकारी हैंडपंप भी खराब पड़ा है। स्वच्छता मिशन के अंतर्गत बना कूड़ा निस्तारण केंद्र भी बंद मिला, जिससे कूड़ा प्रबंधन की पूरी योजना धराशाई दिख रही है।
आवास और पेंशन योजनाओं में भी घालमेल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों को नहीं मिल रहा है, बल्कि जिम्मेदार अपने चहेतों को फायदा पहुंचा रहे हैं। गांव में आज भी कई परिवार झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं, जबकि उन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। वृद्धावस्था पेंशन से भी कई पात्र वंचित हैं, जो लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
जिम्मेदारों के बयान
इस संबंध में सिसवा बुजुर्ग के प्रधान रविन्द्र कुमार ने बताया कि सामुदायिक शौचालय सुबह खुलता है, और पंचायत भवन इस समय सर्वे का काम चल रहा है, इस नाते नहीं खुल पा रहा है। सफाई के लिए सफाई कर्मचारी नियुक्त है, और समय-समय पर सफाई भी होती है, पूरा दिन सामुदायिक शौचालय थोड़े खुलेगा। बाकी जहां सड़कें ठीक नहीं हैं, उन्हें ठीक कराई जाएंगी। वहीं, खण्ड विकास अधिकारी अनिशि मणि पाण्डेय ने बताया कि सामुदायिक शौचालय के खुलने का समय निर्धारित है। पंचायत भवन की जहां तक बात है, इस समय फैमिली आईडी घर-घर जाकर बनाई जा रही है, उसी सर्वे में लोग लगे हैं, फिर भी इसको दिखवाकर सही कराया जाएगा। अगर फॉगिंग और सफाई व्यवस्था में लापरवाही है तो जांच कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकारी योजना को धरातल में लागू करने पर कोई लापरवाही नजर आती है, तो उसको दिखवा कर जिम्मेदारों के प्रति कड़ी कार्यवाही की जाएगी, विकास और स्वच्छता से कोई समझौता नहीं होगा। सिसवा बुजुर्ग के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने और गांव में विकास कार्यों को गति देने की मांग की है, ताकि सरकारी योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर उतर सकें और ग्रामीण एक बेहतर जीवन जी सकें।







