सपा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी व पूर्व महिला विधायक कीर्ति कोल
MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पाण्डेय) पहले इनको पहचानिये ये समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी हैं। अब इनकी करतूत सुनिये । इन्होने सपा की पूर्व विधायक कीर्ति कोल को फोन कर जिस तरह से अशिष्टय अश्लील शब्दों में बात की है इससे हयादारों का सिर शर्म से झूक जायेगा। इस आशय का एक आडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पूर्व महिला विधायक से चौधरी साहब कहते सुनेजा रहे हैं, “हम डायलिसिस पर हई & हमइ देखइ & “न अउबू” इसके बाद फिर धमकियां । शब्द ऐसे अश्लील कि उसे लिखा नहीं जा सकता। दरअसल बात यह थी कि कीर्ति कोल ने अपनी पार्टी में ही कहा था कि जिलाध्यक्ष हमेशा बीमार ही रहते हैं, इसलिये वे जब तक पूर्ण स्वस्थ्य नहीं हो जाते तब तक उनकी जगह कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिये। यहीं बात चौधरी साहब को इतना नागवार गुजरी कि वे सारी मर्यादा ही भूल गये और बेहुदगी पर उतर आये और व्यंग कसते हुये बोले कि मैं डायलिसिस पर हूं देखने नहीं आओगी। जब महिला विधायक इसका प्रतिरोध करते हुआ कहा कि आप बुजुर्ग व्यक्ति हैं, ऐसी अपमानजनक अशिष्ट व अश्लील, भाषा का प्रयोग न करे लेकिन चौधरी कहां मानने वाले थे। विधायक ने बार-बार अनुरोध किया कि ऐसी अमर्यादित भाषा का प्रयोग न करें। इसपर चौधरी रुकने के बजाय सीधे चालीस से एक सौ दस की स्पीड पकड़ लिये और धमकी पर उत्तर आये। धमकी देते हुये महिला विधायक को कहा, घबराओं मत। मैं देख लूंगा तुम्हारा, मैने चुनाव के समय तुम्हे तीन लाख दिया। जिला पंचायत चुनाव में तुम्हे इतना दिया-उतना दिया। इसपर महिला विधायक ने पुनः टोंका, आपने मुझे एक नया नहीं दिया। जिसे दिया है, वह जानें आप जाने । बस मैं इतना कहूंगी कि भाषा सुधार कर बोलिये। सवाल पैदा होता है कि क्या चौधरी साहब अपने घर की बहन-बेटियों से ऐसे ही अश्लील लहजे में बात करते हैं? यदि नहीं तो, उन्हें किसने यह अधिकार दे दिया कि वे अन्य बहन-बेटियों, विशेषकर दलित बेटी से ऐसा बर्ताव व उसकी मर्यादा ही तार-तार कर दे। आम बोल-चाल की भाषा विशेषकर, जनप्रतिनिधियों व देश के कर्णधारों की भाषा सदैव शिष्ट, संयमित और संसदीय होनी चाहिये। लेकिन अफसोस यह कि अनपढ़ और गंवार व्यक्ति की अपेक्षा इन्ही माननीयों की भाषा में ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है। क्या सपा आलाकमान अखिलेश यादव चौधरी के अमर्यादित भाषा पर लगाम लगायेगे या उनकी बेहूदी भाषा पर प्रसन्न होकर उनकी पीठ थपथपाते हुये, उन्हें कोई अन्य तमगा प्रदान करेगें।







