संवेदना साहित्य समिति के तत्वावधान में आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रम एक शाम वतन के नाम
JALAUN NEWS: पूर्व सैनिकों सहित विभिन्न क्षेत्रों की तमाम हस्तियों का लगभग 67 का सम्मान हुआ सैनिक एवं साहित्यकार ,संगीतकार ,बांसुरी वादक विभिन्न प्रतिभाएं जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया उन्हें सम्मानित किया गया।
जनपद जालौन के मुख्यालय उरई स्टेशन रोड स्थित सिटी सेंटर में साहित्य समाज व संस्कृति को समर्पित अग्रणी संस्था के तत्वावधान में संस्था की अध्यक्षा डॉ.माया सिंह माया द्वारा कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का भब्य आयोजन एक शाम वतन के नाम दीप प्रज्वलन शंखनाद के साथ वाणी वंदना अंसार कंम्बरीजी के द्वारा की गई। रामसेवक जी ने बांसुरी वादन कर वातावरण को महकाया जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वह भारत देश है मेरा।
इस भव्य कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं अधिवक्ता पंडित यज्ञ त्रिपाठी ने की तथा इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि करनल दुष्यंत सिंह चौहान 58 वीं बटालियन एनसीसी उपस्थित रहे और उन्होंने अपने संवेदनाओं के सागर से जो पढ़ा-मैं हूं पथिक मार्ग की बाधा,कंकड़ कांटों से परिचित हूं, मंजिल दूर बहुत है लेकिन,
मैं गतिशील अविजित हूं….
कार्यक्रम के विशिष्ट तिथि के रूप में नयन सिंह कमांडर जिला सैनिक बोर्ड उपस्थित रहे।शिक्षा के क्षेत्र में अशोक राठौर एस.आर. ग्रुप, के निदेशक एवं समाजसेवी, अरविंद सिंह चौहान प्रतिनिधि जल शक्ति मंत्री उत्तर प्रदेश चिकित्सा के क्षेत्र में डॉक्टर अवनीश बनोधा एवं डॉक्टर सुनीता बनोधा ,इतिहास विद् डॉ हरिमोहन पुरवार, श्रीमती संध्या पुरवार सम्मानित किए गए।विशेष इस कार्यक्रम में शहीद सैनिकों की पत्नियों को वह वीरांगनाएं जिनका सब कुछ उजड़ गया पुष्प लता देवी पत्नी कीर्ति शेष मनोज सिंह वीरांगना क्रांति देवी कीर्ति शेष धर्मपाल जैसारी कला को सम्मानित किया गया दिव्यांग कवित्री संस्कृति गुप्ता वी शिक्षक दिव्यांशु दिव्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभाका परचम फहराने वाली लगभग 67 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। संचालन डॉ.माया सिंह माया एवं कानपुर से पधारे श्रावण शुक्ल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में 25 एनसीसी कैडेट को भी मेडल पहनकर तथा प्रशस्ति पत्र, अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। तदुपरांत संस्था उपाध्यक्ष लाखन सिंह कुशवाहा समाज सेवी ने संवेदना साहित्य समिति की प्रगति आख्या प्रस्तुत की तदुपरांत कवि सम्मेलन की शुरुआत जो जिसमें देर रात तक गीत गजल कविता तथा छंदो पर श्रोता मंत्र मुग्ध होझूमते रहे शिकोहाबाद से पधारे कवि रवींद्र रंजन ने पढ़ा-अरे ताबूत जाने क्यों तिरंगे में लपेटा है चढ़ाकर प्राण की समिधा सरहदी शेर लेता है। कानपुर से पधारे-अतिथि अंसार कमरे में पढ़ा मानचित्र पर लाख तुम खींच करो लकीर जिसका हिंदुस्तान है उसका है कश्मीर। श्रवण शुक्ल कानपुर-ने अपने हास्य व्यंग के माध्यम से श्रोताओं को हंसने और सोचने पर मजबूर कर दिया
डॉ शिवमंगल सिंह मंगल लखनऊ ने राष्ट्रभक्ति के गीत समर्पित कर श्रोताओं का मन मोह लिया जमकर वाही लूटी आंचल शर्मा जालौन ने पढ़ा-सब देशों से प्यारा लगता अपना हिंदुस्तान देश का बच्चा-बच्चा अपनी जान कर कुर्बान हो गा ले वंदे मातरम
राघवेंद्र प्रताप सिंह जालौन सुंदरतम से सुंदर हो तुम जैसे कोई गुल्मीर,आंखें हैं डल झील तुम्हारी सूरत है कश्मीर
डॉ माया ने अपने जज्बात यूं रखें-रात काली सही बनके सविता रहो,मन महक जाए ऐसी सुकविता कहो… इसके अलावा स्थानीय एवं संस्था के साहित्यकार उपस्थित रहे वरिष्ठ कवि विवेकानंद श्रीवास्तव, प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम, शिखा गर्ग, शिरोमणि सोनी, प्रियंका शर्मा ,शांति कनौजिया, राजू टिमरों, दिव्यांशु दिव्य, संस्कृति गुप्ता, सिद्धार्थ त्रिपाठी शिवा शुक्ला, आदि ने काव्य पाठ किया संगीतकार सुरेंद्र खरे ने भी अपनी स्वरचित गजल पढ़ी तमाम गण मान्य एवं बुद्धिजीवी लगभग 200 लोगों के ऊपर संख्या उपस्थिति रही जिन्होंने कार्यक्रम को सारा एवं ऐतिहासिक बताया।







