रिश्तों की सीढ़ी पर चढ़कर मिली नौकरी, सिस्टम बना मूकदर्शक
मदरसा मुहम्मदिया फैजे रसूल के फर्जीवाड़े की खुली पोल
KUSHINAGAR NEWS: जनपद के तमकुहीराज तहसील अन्तर्गत पिपरा कनन बोदा टोला स्थित मदरसा मुहम्मदिया फैजे रसूल में नियुक्तियों को लेकर ऐसा खेल सामने आ रहा है, जिसमें नियमों से ज्यादा रिश्तों की भूमिका अहम दिखाई दे रही है। चयन प्रक्रिया कागज़ों में भले ही पारदर्शी दिखे, लेकिन अंदरखाने सब कुछ पहले से तय होने के संकेत मिल रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक, नियुक्तियों के दौरान बनाई गई चयन समितियां निष्पक्षता के बजाय धनबल, प्रभाव और संबंधों के दायरे में सिमटी नजर आ रही हैं। यहां खेल सीधा नहीं, बल्कि बेहद सुनियोजित है। नियम मौजूद हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल पालन के लिए नहीं, बल्कि ‘मैनेज’ करने के लिए किया गया है। कागज़ों पर सब कुछ दुरुस्त, विज्ञापन निकला, चयन समिति बैठी, इंटरव्यू हुआ, लेकिन हकीकत में फैसले पहले ही तय हो जाते हैं। सवाल यह है कि जब चयन प्रक्रिया शुरू होती है, तो क्या वास्तव में योग्यता देखी जाती है, या सिर्फ रिश्तों की गिनती?जांच में अब धीरे-धीरे कई परतें खुल रही हैं—रिकॉर्ड में गड़बड़ी, चयन प्रक्रिया में हेरफेर और समिति गठन में अनियमितताएं। यह संकेत दे रहा है कि मामला सिर्फ एक-दो नियुक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित तरीके से चल रहे खेल का हिस्सा हो सकता है।स्थानीय लोगों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि शिक्षा संस्थानों को निजी प्रभाव का केंद्र बनाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी गंभीर अन्याय है।
विदेश में रहकर शिक्षिका उठाती वेतन
पिपरा कनक बोदा टोला स्थित मदरसा मुहम्मदिया फैजे रसूल का मामला तब सुर्खियों में आया, जब 13 अप्रैल को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी भरत लाल गोंड ने यहां औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जब उपस्थिति रजिस्टर खंगाला गया, तो एक ऐसा सच सामने आया जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए।
रजिस्टर में सहायक अध्यापिका तालीमुन निशा के नाम के सामने 25 मार्च से 27 मार्च और 30 मार्च तक आकस्मिक अवकाश दर्ज था। पहली नजर में यह सामान्य प्रविष्टि लगी, लेकिन जब इस अवकाश को लेकर प्रधानाचार्य और लिपिक से पूछताछ हुई, तो उन्होंने लिखित में स्वीकार किया कि यह अवकाश खुद प्रबंधक द्वारा दर्ज किया गया है। यहीं से संदेह की शुरुआत हुई।जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि जिस अवधि में शिक्षिका का अवकाश दर्ज है, वह उस समय देश में ही नहीं, बल्कि विदेश में मौजूद थीं। इसके बावजूद उनके फरवरी और मार्च महीने का वेतन न केवल बिल बनाकर भेजा गया, बल्कि भुगतान भी करा लिया गया। दस्तावेजों की पड़ताल में यह भी सामने आया कि संबंधित शिक्षिका, प्रबंधक की ही बेटी हैं।
इस खुलासे के बाद मामला महज लापरवाही का नहीं, बल्कि सुनियोजित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में यह पोल भी खुल गयी कि नियुक्ति के समय नियमों को दरकिनार करने के लिए प्रबंधन में बदलाव किया गया था, ताकि परिजनों की तैनाती का रास्ता साफ हो सके। मदरसा विनियमावली 2016 के तहत प्रबंधक या समिति के सदस्य अपने पुत्र-पुत्री की नियुक्ति नहीं कर सकते, बावजूद इसके नियमों को नजरअंदाज किया गया।
फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही 16 अप्रैल को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने रवींद्रनगर धूस थाने में तहरीर देकर प्रबंधक और उनकी शिक्षिका बेटी के खिलाफ सरकारी धन के कुटरचित गबन और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दिया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद एसपी के निर्देश पर दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया और अब मामले की विस्तृत जांच जारी है।
वर्ष 2016 मे हुई विदेश रहकर वेतनी उठाने वाली शिक्षिका की नियुक्ति
बताया जाता है कि तकरीबन 15 शिक्षकों और साढ़े पांच सौ छात्रों वाले मदरसा मुहम्मदिया फैजे रसूल मदरसा को वर्ष 2015 से अनुदान मिलना शुरू हुआ था, जबकि संबंधित शिक्षिका की तैनाती 2016 में हुई थी। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद न सिर्फ मदरसे में हड़कंप मचा है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं देखना यह है कि क्या योगी सरकार मे फर्जीवाड़ा करने वाली इस मदरसे पर कोई ठोस कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी अधिकारियों के टेबल पर फाइलों में दफन होकर रह जायेगी।







