JALAUN NEWS: स्वतंत्रता दिवस के पूर्व सप्ताह एवं रक्षाबंधन के उपलक्ष में 58 वाहिनी एनसीसी के सानिध्य एवं संवेदना साहित्य समिति की अध्यक्षा वरिष्ठ कवयित्री डॉ माया सिंह माया के संयोजन में वाहिनी के उरई स्थित कार्यालय में सूर्य प्रभा कवि संगम के कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें जनपद के राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवियों एवं कवयित्रियों ने राखी और राष्ट्र प्रेम के गीत और कविताओं का रस बरसाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया सूर्य प्रभा कवि संगम के इस स्मरणीय कवि संगम की अध्यक्षता वाहिनी के कमान अधिकारी एवं कवि कर्नल दुष्यंत सिंह चौहान ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार पंडित यज्ञदत्त त्रिपाठी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की व्यवस्था में सूबेदार दुर्गाराम, सूबेदार अनिल, नायब सूबेदार नरेंद्र, नायब सूबेदार विनोद सहित अन्य जवानों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अध्यक्ष कर्नल दुष्यंत सिंह चौहान ने देशभक्ति की रचनाओं और गीतों से प्रभावित होकर मुक्त कंठ से कवियों की राष्ट्रभक्ति की कविताओं की प्रशंसा की और वाहिनी की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर कवियों एवं कवयित्रियों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम का विशेष आकर्षण यह था कि कवि गोष्ठी के पूर्व संवेदना साहित्य समिति द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित वाहिनी अधिकारियों और राष्ट्र रक्षक सैनिकों की कलाइयों पर राखियां बांधी तथा तिलक किया यह मनमोहक दृश्य देखकर कक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गोष्ठी का कुशल संचालन कार्यक्रम की संयोजिका और संवेदना की अध्यक्षा डॉ माया सिंह माया ने किया। कवयित्री प्रियंका शर्मा द्वारा मधुर कंठ से पढ़ी गई सरस्वती वंदना के साथ कवि गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं अधिवक्ता पंडित यज्ञदत्त त्रिपाठी ने पढ़ा- आज जहां रक्षक रहते हैं वहां मन रहा रक्षाबंधन। बहनों ने राखी बांधी है और लगाया अक्षत चंदन। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कर्नल दुष्यंत सिंह चौहान ने पढ़ा- मत तुम गिनना गिनती में जब हम शहीद हो जाएं, स्वर्ग बसें रे देश ए मेरे बस एक विनती अधूरे हमारे सपने हों तब तेरे। क्योंकि हम बस एक गिनती नहीं हैं। कार्यक्रम की संयोजिका एवं संवेदना साहित्य समिति की अध्यक्षा तथा कार्यक्रम का संचालन कर रहीं डॉक्टर माया सिंह माया ने पढ़ा- मेरे भैया न विचलित होना कभी। शत्रु हो सामने छोड़ना न कभी बुंदेली के सशक्त हस्ताक्षर वरिष्ठ कवि सुरेश चंद्र त्रिपाठी ने पढ़ा- जो लों हैं बुंदेलखंड वासी, है बुंदेलखंड, बोलने में मधुर बुंदेली बानी है। तो लों लाल कुंवरि के लाल छत्रसाल वीर, बांकुरे बुंदेला जू की अमर कहानी है। इसके अलावा कवयित्री शिखा गर्ग, सिद्धार्थ त्रिपाठी,कवयित्री शिरोमणि सोनी,कवयित्री प्रियंका शर्मा,कवि दिव्यांशु दिव्य,
कवयित्री प्रगति मिश्रा, संस्कृति गुप्ता, अरुण प्रताप सिंह राजू आदि ने सुन्दर काव्य पाठ कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की।







