अधिकारियों एवं अन्य के संरक्षण से दूधिया लाइट में हुआ भ्रष्टाचार
FATEPUR NEWS: जिले में इन दिनों असोथर नगर पंचायत में जनता के टैक्स के पैसे से अधिकारियों से लेकर कर्मचारी एवं सफेद पोश नेताओं ने मिलकर लाखों रुपए डकार लिए। पूरे मामले में फर्जीवाड़ा भी इस कदर से हुआ कि प्रोजेक्ट बनाए जाते रहे और भुगतान किया जाता रहा लेकिन मौके पर हकीकत कुछ भी नहीं नजर आई। फर्जी एवं मनमानी तरीके से भुगतान कर दिए गए मामला जिला अधिकारी के संज्ञान में पहुंचा तो नगर पंचायत के कर्ताधर्ता बने अधिकारियों एवं सफेद पोश नेताओं की कहानी खुलकर सामने आ गई। पूरे मामले को दबाए जाने को लेकर अब सेटिंग गेटिंग का दौर भी शुरू हो गया है। सूबे की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है, लेकिन लगता है कि लखनऊ से शुरू हुई जीरो टॉलरेंस की बात फतेहपुर आते-आते तक बेमानी साबित हो जाती है, और अगर ऐसा ना होता तो नवगठित असोथर नगर पंचायत का कारगुजारी सुर्खियां ना बन पाती। असोथर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी पिछले काफी वक्त से नगर पंचायत का काम देख रहे हैं, कई बार वक्त पर काम ना होने और सरकार की योजनाओं को धरातल में उतारने में लापरवाही के चलते पिछले कई जिलाधिकारियों ने इनको कारण बताओ नोटिस तक जारी किया है, लेकिन लगता है कि इनका इससे कोई वास्ता ही नहीं रह गया है। असोथर कस्बे में सफाई व्यवस्था से लेकर प्रकाश व्यवस्था के लिए करोड़ों रूपए खर्च हो गए, लेकिन जब काम धरातल पर देखा जाता है तो तस्वीर इससे बिल्कुल ही जुदा नजर आती है। बगैर टेंडर बिना सप्लाई के बांदा की फर्म को लाखों का भुगतान हो गया, वहीं चूना, फॉगिंग, मैलाथियान और छिड़काव की अगर बात करें तो इनकी सप्लाई का हर साल लाखों का टेंडर होता है, लेकिन कस्बे की जनता को उसका कोई भी लाभ होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों की माने तो कस्बे में प्रकाश व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त करने के लिए करीब 1400 लाइटें खरीद कर आई जिसके लिए नगर पंचायत के खाते से लाखों का भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन कस्बे के मुख्य चौराहों को छोड़ दे तो पूरा कस्बा रात होते ही अंधेरे में डूब जाता है, ऐसे में नगर पंचायत प्रशासन के कार्यशैली पर सवाल उठना तो लाजिमी हो जाता है।







