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भारतीय परंपरा को जीवंत रखते हुए रस्मों-रिवाज से हुआ टेसू झेजी का विवाह

AURAIYA NEWS: भारतीय लोक परंपराओं की अमर विरासत को संजोए रखने की सुंदर मिसाल मंगलवार की रात देखने को मिली, जब शरद पूर्णिमा के अवसर पर नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों ने उल्लास पूर्वक टेसू-झेजी विवाह का आयोजन किया। परंपरागत वेशभूषा में सजी-संवरी बालिकाएं सिर पर झेजी रखकर और बालक टेसू का रूप धरकर गीत गाते हुए गलियों में निकले। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच पूरा वातावरण लोक संस्कृति की मिठास से सराबोर हो गया। बच्चों ने दुकानों और घरों से “नेक” के रूप में धन और सामग्री एकत्र की, जिसके बाद बैंड-बाजे की गूंज के साथ टेसू की बारात निकली और झेजी के दरवाजे पहुंचकर द्वारचार की रस्म अदा की गई। रस्मों-रिवाज के साथ विवाह की पूरी विधि संपन्न कर बच्चों ने नृत्य व आतिशबाजी से आनंद उत्सव मनाया। लोक मान्यता के अनुसार विजयदशमी से आरंभ होकर शरद पूर्णिमा तक चलने वाला यह पर्व शुभ विवाह मुहूर्त के आरंभ का प्रतीक भी है। इस दौरान तहसील क्षेत्र के गांवों से लेकर कस्बों समेत कई स्थानों की गलियां बालक-बालिकाओं की टोलियों से गुलजार रहीं। बुजुर्गों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ते हैं। वहीं, झेजी सजाने में बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी ने मिशन शक्ति की भावना को साकार करते हुए समाज में नारी सशक्तिकरण और सम्मान का संदेश भी दिया।