FATEHPUR NEWS: ज्वालागंज स्थित रामलीला मैदान में चल रही श्रीराम कथा के दौरान मंगलवार को ‘भरत चरित’ का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा व्यास चंदन कृष्ण जी महाराज ने भरत के त्याग, प्रेम और मर्यादा का ऐसा सजीव चित्रण किया कि पंडाल में उपस्थित हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं। कथा व्यास ने कहा कि भरत का चरित्र त्याग और भाईचारे की सर्वोच्च मिसाल है। उन्होंने बताया कि अयोध्या का राजसिंहासन भी भरत के लिए तुच्छ था और उन्होंने 14 वर्षों तक नंदीग्राम में रहकर तपस्वी जीवन व्यतीत किया। उन्होंने कहा कि भरत जैसा भाई न कभी हुआ है और न होगा। भरत और भगवान राम के मिलन को ‘प्रेम और कर्तव्य का संगम’ बताते हुए उन्होंने कहा कि जब धर्म और प्रेम के बीच संघर्ष होता है, तो अंततः धर्म की ही विजय होती है। भरत द्वारा भगवान राम की चरण पादुकाओं को सिर पर रखकर अयोध्या लाना उनके त्याग और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। कथा के दौरान कैकेयी के वरदान को ठुकराने की घटना का उल्लेख करते हुए व्यास जी ने कहा कि अधर्म से प्राप्त वैभव कभी सुख नहीं दे सकता। उन्होंने वर्तमान समाज पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज भाई-भाई के बीच संपत्ति विवाद बढ़ रहे हैं, जबकि भरत चरित हमें पारिवारिक एकता और सच्चे प्रेम का मार्ग दिखाता है। कार्यक्रम के अंत में भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें कथा संयोजक एवं उत्तम उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कुमार तिवारी सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भाग लिया। शंखनाद और फूलों की वर्षा के बीच पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। आयोजन समिति ने जानकारी दी कि अगली कथा में ‘शबरी भक्ति एवं राम-हनुमान मिलन’ का प्रसंग सुनाया जाएगा। इस अवसर पर धनंजय मिश्रा, मनोज साहू, आकाश भदौरिया, जय किशन, अनिल महाजन, श्रवण दीक्षित, प्रेमदत्त उमराव, संदीप श्रीवास्तव, संजय सिंह, सौरभ गुप्ता, सोनू शुक्ला, गंगासागर, गंगाशरण करवरिया, शिवप्रसाद मामा, शनि, अतुल कसेरा सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।







