BALRAMPUR NEWS: (कमाल खान) पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार द्वारा जनपद बलरामपुर में साइबर अपराध से सम्बन्धित हॉटस्पॉट के विरुध्द कार्यवाही किये जाने हेतु दिये गये सख्त निर्देश के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक / नोडल अधिकारी साइबर क्राइम विशाल पाण्डेय व क्षेत्राधिकारी तुलसीपुर/ अपराध डॉ जितेन्द्र कुमार के निकट पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना आर0पी0 यादव जनपद बलरामपुर के नेतृत्व में मु0अ0सं0 05/2026 धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338 बीएनएस व व धारा 66 डी आईटी एक्ट के बावत अभियुक्तगण द्वारा संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करने, लोगो को लालच देकर व्यक्तियों के बैंक खाते एवं उनसे लिंक मोबाइल सिम किराये पर लेते थे तथा फर्जी पहचान के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतकर अतिरिक्त खाते व सिम की व्यवस्था कर उसमें साइबर ठगी की धनराशि का सेटलमेन्ट करते थे। अभियोग से सम्बन्धित 05 अभियुक्त जिसमें 1. मो0 अकरम खान को सुआव नाला के पास से व अन्य 04 अभियुक्त को जिसमें 2. बच्चा लाल उर्फ प्रशान्त उर्फ गोलू, 3. आशिफ पुत्र, 4. प्रतीक मिश्रा, 5. सुजीत सिंह को श्याम बिहार कालोनी से गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय भेजा गया।
गिरफ्तार किये गये अभियुक्तो का विवरणः
1. मो0 अकरम खान पुत्र मो0 असलम खान निवासी पुरैनिया तालाब थाना कोतवाली नगर बलरामपुर।
2. बच्चा लाल उर्फ प्रशान्त उर्फ गोलू पुत्र बाबूलाल निवासी नूरी मदरसा मो0 गदुरहवा (दक्षिणी) थाना कोतवाली नगर बलरामपुर।
3. आशिफ पुत्र अबुल कलीम निवासी गदुरहवा थाना कोतवाली नगर बलरामपुर।
4. प्रतीक मिश्रा पुत्र स्व0 चन्द्रदेव मिश्रा निवासी भगवतीगंज थाना कोतवाली नगर बलरामपुर।
5. सुजीत सिंह पुत्र रघुराज सिंह निवासी बेनीनगर पोस्ट धोबहा थाना गौरा चौराहा बलरामपुर।
आपराधिक इतिहास अभियुक्त आशिफ पुत्र अबुल कलीमः
मु0अ0सं0 174/22 धारा 376, 506 आईपीसी थाना झंगहा जनपद गोरखपुर।
अपराध करने का तरीका (Modus Operandi):
अभियुक्तगणों द्वारा संगठित तरीके से साइबर ठगी करने हेतु एक नेटवर्क संचालित किया जाता था, जिसमें ये लोग लालच देकर व्यक्तियों के बैंक खाते एवं उनसे नया सिम खरीदवाकर बैंक खाते लिंक कराकर सिम सहित किराये पर लेते थे जिसके एवज में प्रति खाते का किराया 15000 रुपये से 20000 रुपये खाता धारक को किराये के रुप में देते थे। खाता उपलब्ध कराने वाले एजेन्टों को 5000 रुपये तक किराया प्रदान जाता था तथा फर्जी पहचान पत्र के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतकर अतिरिक्त खाते व सिम की व्यवस्था करते थे। मुख्य संचालक गिरोह इन खातों का उपयोग कर स्वयं को परिचित बताकर या अन्य माध्यमों से पीड़ितों से ऑनलाइन धोखाधड़ी व आनलाइन सट्टा (अन्ना रेड्ड़ी बुक) जैसे माध्यमों से प्राप्त धनराशि को क्यूआर कोड, यूपीआई एवं इंटरनेट बैंकिंग के जरिए इन किराये के खातों में मंगाकर विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर उसका सेटलमेंट करते थे, जिससे धन के स्रोत को छुपाया जा सके। इसके लिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से समन्वय किया जाता था तथा बैंक खातों (बैंक पासबुक, एटीएम, सिमकार्ड) को गुप्त रूप से कोरियर (मिठाई के डिब्बों में छिपाकर) अन्य सहयोगियों तक भेजा व प्राप्त किया जाता था । अभी तक के अन्वेषण से इनके पास से 17 बैंक खाते बरामद हुये हैं जिनका उपयोग साइबर ठगी में किया जा रहा था। अभियुक्तगणों से प्राप्त बैंक खातों पर भारत भर में कुल 14 आनलाइन शिकायतें दर्ज हैं जिसमें कुल शिकायत की धनराशि लगभग 58 करोड़ दर्ज है। साइबर ठगी में प्रयोग किये गये खातों में से 08 बैंक खातों का विवरण बैंक से प्राप्त हो पाया है जिसमें कुल 5,06,07,956.09 (पांच करोड छः लाख सात हजार नौ सौ छप्पन) रुपये लेन-देन होना पाया जा रहा है शेष बैंक खातों का विवरण प्राप्त होना अभी शेष है।







