सीपी और डीएम ऑफिस के बाहर लगाए मुर्दाबाद के नारे, पुलिस फोर्स को ललकारा
VARANASI NEWS: वाराणसी कचहरी परिसर में आज शनिवार को एक बार फिर अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच तनातनी का माहौल देखने को मिला। सुबह अधिवक्ताओं का एक बड़ा जत्था सड़क की ओर बढ़ा, लेकिन सैनिक कैंटीन होटल के पास ही वरिष्ठ अधिवक्ताओं के समझाने पर लौट गया। सूत्रों के अनुसार कुछ वकील पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक घुसने का प्रयास कर रहे थे, किंतु मामला नियंत्रण में आ गया और सभी वापस कचहरी लौट गए। तनाव की जड़ हाल ही में वायरल हुआ वह वीडियो है, जिसमें एडीसीपी नीतू कात्यायन और कैंट थानाध्यक्ष शिवाकांत मिश्र के बीच विवाद का मामला सामने आया। इस वीडियो के बाद वकीलों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज कर दी। बार एसोसिएशन के नेताओं का कहना है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।
शनिवार को बनारस बार और सेंट्रल बार ने संयुक्त रूप से रणनीति बनाई और न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। वकीलों ने पुलिस कमिश्नरेट और डीएम कार्यालय पहुंचकर ष्पुलिस-प्रशासन मुर्दाबादष् के नारे लगाए। वकीलों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी दोनों ही अपने-अपने दफ्तर नहीं पहुंचे। इधर, अदालत में भी मामले की गूंज सुनाई दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एडीसीपी नीतू कादयान, एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना, एसीपी कैंट नितिन तनेजा, थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्र समेत 50 अज्ञात दरोगाओं और 50 अज्ञात सिपाहियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अपील दायर की गई है। तनाव की शुरुआत 16 सितंबर को हुई थी, जब वकीलों ने एक दरोगा पर मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि इसके बाद दरोगा के परिजनों ने भी 10 नामजद अधिवक्ताओं और 50-60 अज्ञात लोगों पर थाने में केस दर्ज कराया। जब पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं की, तो दरोगा पक्ष के लोग पुलिस मुख्यालय धरने पर बैठ गए। इसकी सूचना पर बड़ी संख्या में वकील भी वहां पहुंच गए, जहां महिला आईपीएस अधिकारी और अधिवक्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच अविश्वास की खाई को और चैड़ा कर दिया है। वकीलों का कहना है कि यदि पुलिस एकतरफा कार्रवाई करेगी तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। वहीं पुलिस अफसरों की ओर से इस मामले में चुप्पी साधी गई है। अब सबकी निगाहें सीजेएम कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
’दिन भर प्रदर्शन, 4 घंटे बैठक में तय आंदोलन’
गुरुवार और शुक्रवार को भी वकीलों ने विरोध किया था। शुक्रवार दोपहर से शाम तक कई राउंड लगभग 4 घंटे मीटिंग का दौर चला और फिर हड़ताल का फैसला लिया गया। सेंट्रल बार के अध्यक्ष मंगलेश दुबे और बनारस बार के अध्यक्ष सतीश तिवारी ने अधिवक्ताओं से चर्चा की। महामंत्री शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस के पैरोकार कोर्ट नहीं आ रहे, थानों से दस्तावेज दाखिल नहीं हो रहे, जिनसे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। यह अघोषित हड़ताल की तरह है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के गेट पर नीतू कादयान की शैली अभी तक वैसी ही है, सीपी कार्यालय पर भी अधिवक्ताओं के साथ गलत व्यवहार किया गया। पुलिस अफसर धमका रहे हैं और उनकी भाषा गुंडों जैसी है, इन्हें बनारस से बाहर स्थानांतरित किया जाए, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
’नीतू कादयान पर दुर्व्यवहार का आरोप’
दरोगा की पिटाई के बाद वकीलों के खिलाफ कैंट थाने में केस दर्ज किया गया है। इससे वकील आक्रोशित हैं। उधर, सीपी कार्यालय में 18 सितंबर को नीतू कादयान ने वकीलों से दुर्व्यवहार किया तो मामला ज्यादा भड़क गया है। वकीलों का कहना है कि पुलिस कार्यालय परिसर में अधिवक्ता साथियों के साथ फिर से दुर्व्यवहार किया गया। पुलिस का वकीलों के प्रति व्यवहार अत्यंत निंदनीय व शर्मनाक है। यह घटना न केवल अधिवक्ताओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा पर भी गंभीर आघात है। प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।







