SITAPUR NEWS: भारत एजुकेशनल वेलफेयर ट्रस्ट, लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी, उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से दिनांक 28-03-2026, दिन- शनिवार को फातिमा शेख के जीवन और उनकी शिक्षा में योगदान विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन राजकीय महिला महाविद्यालय, सूख सराव, सीतापुर में जायोजित किया जा रहा है।उक्त समारोह में जनाय शफाअत हुसैन, निदेशक, उत्तर प्रदेश वक्फ विकास निगम, उ०प्र० सरकार, लखनऊ मुख्य अतिथि होंगे तथा प्रोफेसर (डॉ०) कामिनी वर्मा, प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय, सीतापुर तथा प्रोफेसर (डॉ०) गणेश प्रसाद, पूर्व प्राचार्य, गायत्री दिद्यापीठ पी०जी० कॉलेज, रिसिया, बहराइन विशिष्ट अतिथि होंगे। उक्त के अतिरिक्त इस सेमिनार में अनेक गणमान्य व्यक्ति स्थानीय जन, रामूह, छात्र-छात्राये, स्थानीय महिलाये व अन्य व्यक्ति शामिल होंगे। उक्त सेमिनार में डॉक्टर शमीम अख्तर अंसारी, पूर्व निदेशक, वन उत्पादकता संस्थान, वन एवं पातावरण मंत्रालय, भारत सरकार, डॉक्टर मो सईद प्रोफेसर अर्थशास्त्र, फखरुद्दीन अली अहगद पी०जी० कॉलेज, महमूदाबाद, सीतापुर, डॉ० अभिय कुमार प्रोफेसर राजनिक विज्ञान, राजकीय महिला महाविद्यालय, सीतापुर, डॉ० दाऊद अहमद प्रोफेसर, फखरुद्दीन अली अहमद पी०जी० कॉलेज, महगूदाबाद, सीतापुर, डॉक्टर रजनीकान्त र संजकीय महिला विलय, सीतापुर, डॉ० कृति शर्मा एसो० प्रोफेसर, नारी निकेतन पी०जी० कॉलेज, लखनऊ एवं डॉ० शिशिर श्रीवास्तव एसो० प्रोफेसर, राजकीय महिला महाविद्यालय, सीतापुर मुख्यवक्ता होगे। भारत एजुकेशनल वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ० आलमीन अली द्वारा बताया गया कि फातिमा शेख 19वी सदी की एक अग्रणीय शिक्षाविद, समाज सुधारक और महिला शिक्षा आन्दोलन की महान स्तंभ थी। वे भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका के रूप में भी जानी जाती है। उनका जन्म 9 जनवरी 1831 को पुणे में हुआ था। उनका सम्पर्क सावित्री बाई फुले और ज्योतिबा फुले से हुआ जिसके परिणाम स्वरुप उन्होंने महिला शिक्षा के आंदोलन में सक्रीय भूमिका निभाई। 1848 में स्थापित भारत के प्रारंभिक बालिका विद्यालयों में उनके योगदान के साथ-साथ प्रौढ़ शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपुर्ण भूमिका निभाई है। सामाजिक रुष्ट्रवादिता, जातिगत भेद रूढ़िवादी मान्यताओं का विरोध करते हुए शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया और लड़कियों को विद्यालय तक लाने का प्रयास किया। फातिमा शेख का पूरा जीवन संघर्ष, सामाजिक परिवर्तन और शिक्षा के प्रचार-प्रसार का एक प्रेरक उदहारण है जो आज भी भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक स्थायी स्थान प्राप्त करता है।फातिमा शेख की शिक्षाओं को अस्मरण करना और उनके द्वारा बताये गए मार्ग पर चल कर ही आज हम एक स्वच्छ एवं गुणवक्तापूर्ण शिक्षा को अपना सकते हैं।





