मुद्दा सदन तक गूंजने के आसार
KUSHINAGAR NEWS: जनपद में सरकारी प्रोटोकॉल की अनदेखी का सनसनीखेज मामला खूब चर्चा में है जिसकी गूंज अब लखनऊ तक सुनाई देने की संभावना है। सबब यह है कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य व प्रश्न एवं संदर्भ समिति के अध्यक्ष ध्रुव कुमार त्रिपाठी के सरकारी दौरे के दौरान बुधवार को जो कुछ भी हुआ, उसने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं। चर्चा – ए-सरेआम है कि एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी जैसे ही कुशीनगर की सीमा में दाखिल हुए, वैसे ही प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ती नजर आईं, न कोई वरिष्ठ अधिकारी स्वागत के लिए मौजूद थे, न ही वह औपचारिक सम्मान दिया गया, जो नियमों के तहत अनिवार्य है। लापरवाही यहीं नहीं थमी, बताया जाता है कि रात्रि विश्राम के दौरान भी व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त रहीं, जिसके वजह से सभापति की नाराजगी और गहरी हो गई। सूत्रो के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम से क्षुब्ध एमएलसी ने कई अधिकारियों के व्यवहार को ‘दुर्व्यवहार’ की श्रेणी में रखते हुए कड़ी आपत्ति जताई। हालात इतने बिगड़ गये कि उन्होंने कुछ अधिकारियों से औपचारिक शिष्टाचार तक निभाने से इनकार कर दिया। यह संकेत साफ है कि मामला अब सिर्फ प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सम्मान और जिम्मेदारो की जवाबदेही तय करने का बन चुका है।दिलचस्प बात यह है कि तीखी नाराजगी के बावजूद एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विकास भवन में विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान कई योजनाओं की धीमी प्रगति पर भी सवाल उठाए गए, लेकिन असली चर्चा प्रोटोकॉल की चूक को लेकर ही केंद्रित रही। अधिकारियों के पास जवाब कम और सफाई ज्यादा नजर आई। अब राजनीतिक हलकों में यह मामला तेजी से गर्म हो रहा है। चूंकि श्री त्रिपाठी स्वयं प्रश्न एवं संदर्भ समिति के अध्यक्ष हैं, ऐसे में इस प्रकरण को विधान परिषद में उठाए जाने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। यदि ऐसा हुआ, तो कुशीनगर प्रशासन को न केवल जवाब देना होगा बल्कि संभावित कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में
प्रशासन की इस लापरवाही ने कई बुनियादी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या जिले में प्रोटोकॉल सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या अधिकारियों की जवाबदेही खत्म होती जा रही है? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार होता होगा?
जानकार बोले
विशेषज्ञों का कहना है कि चूकि ध्रुव कुमार त्रिपाठी शिक्षक एमएलसी व प्रश्न एंव सन्दर्भ समिति के सभापति है इसलिए प्रोटोकॉल के अनुसार उनकी प्रारम्भिक स्वागत की जिम्मेदारी डीआईओएस व एडीएम की होती है किन्तु सभापति के स्वागत और अगुवाई के समय डीआईओएस व एडीएम दोनो अधिकारी नदारत रहे यहां तक कि रात्रि विश्राम के दौरान किसी अधिकारी ने व्यवस्था नही देखी।
डीआईओएस को लगायी फटकार
सूत्रो की माने तो प्रश्न एंव सन्दर्भ समिति के सभापति ध्रुव कुमार त्रिपाठी की नाराजगी उस समय जगजाहिर हो गयी जब समीक्षा बैठक मे उन्होने डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त से 31 मार्च तक सेवानिवृत्त हुए शिक्षको की पुरी जानकारी मांगी और डीआईओएस, सभापति के सवालो का जबाब देने के बजाय निरुत्तर होकर अगल-बगल झाकने लगे। इसके बाद सभापति ने एक के बाद एक करके कई सवाल दागे लेकिन डीआईओएस के पास उनके सवाल का कोई जबाब नही था। नतीजतन प्रोटोकॉल की उडाई गयी धज्जियाँ से नाराज सभापति ने डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त को जमकर फटकार लगायी। इसको लेकर प्रशासनिक गलियारों मे चर्चाओं का बाजार गरम रह।
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