पेट्रोल-डीजल पर राहत सिर्फ नायरा से, बाकी कंपनियों पर उठे सवाल
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल हुआ सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस
FATEHPUR NEWS: (शीबू खान) देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। निजी क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी नायरा एनर्जी द्वारा कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल के दाम कम किए जाने के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि यदि एक कंपनी कीमतों में कटौती कर सकती है तो इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) और जियो-बीपी जैसे अन्य तेल विक्रेताओं ने अभी तक अपने दामों में कमी क्यों नहीं की। बताते चलें कि 1 जुलाई को नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में 5 और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। मिडिल ईस्ट में टेंशन कम होने और कच्चे तेल की सप्लाई फिर से सामान्य होने से ग्लोबल बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई है, जिसके चलते कंपनी ने ये फैसला लिया है। साथ ही बता दें कि नायरा एनर्जी के पूरे देश में 7000 से ज्यादा पेट्रोल-पंप हैं, इन सभी पेट्रोल पंप पर ये कटौती लागू की गई है। हालांकि, अलग-अलग जगहों पर स्थानीय टैक्स की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुछ अलग रही हैं। सरकारी तेल कंपनियों की बात करें तो भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम में फिलहाल अपने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थी, ऐसे में कई तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। जिसमें सबसे पहले नायरा एनर्जी ने ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे और पेट्रोल में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़त की थी तथा डीजल 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था। वहीं सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम कुल 7.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 7.60 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए थे। बता दें कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25 मई को बढ़ोतरी हुई थी। और अब यूएस और ईरान के बीच समझौता होने की खबरों की वजह से कच्चे तेल में नरमी देखी गई है। 1 जुलाई को कच्चा तेल 0.33 फीसदी उछलकर 73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, अब ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ने से तेल कंपनियों पर भी काफी हद तक दबाव काफी कम हो गया है।
इस मुद्दे पर आम लोगों से बातचीत करने पर अधिकांश उपभोक्ताओं ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार और प्रतिस्पर्धा के आधार पर एक कंपनी कीमतें कम कर रही है तो अन्य कंपनियों को भी उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए। लोगों का कहना है कि ईंधन की कीमतों का सीधा असर परिवहन, कृषि, व्यापार और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं पर पड़ता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दामों में थोड़ी सी कमी भी आम आदमी के लिए राहत लेकर आती है। कुछ वाहन चालकों ने कहा कि यदि निजी कंपनियां कम कीमत पर ईंधन उपलब्ध करा रही हैं तो सरकारी तेल कंपनियों को भी प्रतिस्पर्धी रुख अपनाना चाहिए। उनका मानना है कि सभी कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होने से उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। हालांकि, ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सभी तेल कंपनियां एक जैसी मूल्य निर्धारण नीति पर काम नहीं करतीं। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत, विपणन मार्जिन, परिचालन व्यय तथा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले कर शामिल हैं। इसके अलावा प्रत्येक कंपनी अपनी व्यावसायिक रणनीति, बाजार हिस्सेदारी और स्थानीय प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर अलग-अलग क्षेत्रों में कीमतों में बदलाव कर सकती है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निजी कंपनियां कई बार ग्राहकों को आकर्षित करने और बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से सीमित क्षेत्रों में विशेष मूल्य निर्धारण (लोकल प्राइसिंग स्ट्रेटेजी) अपनाती हैं। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां कई आर्थिक और व्यावसायिक पहलुओं का आकलन करने के बाद ही कीमतों में बदलाव करती हैं। फतेहपुर के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर पहुंचे उपभोक्ताओं ने मांग की है कि यदि बाजार की परिस्थितियां अनुकूल हैं तो सभी तेल कंपनियों को पारदर्शिता के साथ अपने मूल्य निर्धारण का आधार सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि लोगों को यह स्पष्ट हो सके कि अलग-अलग कंपनियों के दामों में अंतर क्यों है। फिलहाल, संबंधित तेल कंपनियों की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक संयुक्त स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है कि नायरा एनर्जी द्वारा कीमतों में कटौती के बावजूद अन्य कंपनियों ने अपने खुदरा दामों में समान कमी क्यों नहीं की है। ऐसे में उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या आने वाले दिनों में अन्य कंपनियां भी अपने ईंधन की कीमतों में राहत देंगी या नहीं।







