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धनत्रयोदशी

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मोनिका डागा "आनंद"
शीर्षक – धनत्रयोदशी
तीज तेरस अनूठे शुभ मुहूर्त ये, नव निधि और सौभाग्य लाएं,
आरोग्यता और सुख समृद्धि, जीवन में “आनंद” को बढाएं ।
धनत्रयोदशी तिथि को सभी, धनवंतरि का आशीर्वाद पाएं,
स्वस्थ तन-मन संग अक्षय धन, का ये संयोग खुशियॉं बरसाएं ।
कर आराधना यक्षराज कुबेर की, अपने भाग्य को स्वयं चमकाएं,
धन-धान्य का हो शुभ आगमन, श्रद्धा प्रेम भाव से कीर्तन गाएं ।
गृह क्लेश मनमुटाव से दूर रहें, परिवार संग सदा हॅंसे मुस्काएं,
बहुत चंचल है माता महालक्ष्मी, प्रेम सौहार्द शांति आप बनाएं ।
सुखों का करें हम आदान-प्रदान, फूल खुशियों के मिलकर खिलाएं,
ऊॅंच-नीच की बेतूकी लकीरों को, चलो चुपचाप आज हम मिटाएं ।
प्रसन्नता का संगीत हो बिखरा, त्योहारों की जगमग रौनक बढाएं,
सेतू बनकर गरीब परिवारों तक, नयी खुशियॉं धीरे से पहुंचाएं ।
कुछ खुशियों को सहर्ष बांटे, भीतर आत्मिक चमक जगाएं,
धन के प्रवाह को प्रेम रंग में रंग, करोड़ों दिलों में जगह बनाएं ।
व्यवसाय की हो चौगुनी प्रगति, थोड़ा अवश्य दान धर्म अपनाएं,
संस्कारों का रखें सदा मान भी, और खुशी-खुशी नाचें गाएं ।
निज संस्कृति पर करें गर्व, व्यहवार को हमेशा मृदु बनाएं,
स्वार्थ की सवारी को त्याग, सूरज सा उजाला सर्वत्र फैलाएं ।
महत्ता उत्सवों की है अलग, जाने समझे व अपनी रूचि बढ़ाएं,
भक्ति और भाव का हो संगम, अनगिनत दुआएं जीवन में कमाएं ।
–  मोनिका डागा “आनंद” , चेन्नई, तमिलनाडु