लखनऊ। (परवेज़ आलम, ब्यूरो प्रमुख ) । देश में सीसीटीवी और बायोमेट्रिक मशीनों के उपयोग को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, खासकर चीनी कंपनियों के उत्पादों के संबंध में । ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय कर्मचारियों का सारा डाटा बायोमेट्रिक मशीनों के माध्यम से चीन ट्रांसफर हो रहा है इसके साथ ही फोन की किड चीन से इंडिया आती है जबकि भाजपा शासन या सरकार के समर्थक अधिकांशत चीनी सामानों का विरोध भी करते हैं।। इससे सरकार के कथनी और करनी में साफ अंतर दिखता है जो चिंता का विषय है।
जानकारी सामने आ रही है कि हमारी इकोनॉमी की 60% हिस्सा सर्विस पर Based है जो बहुत ही खतरनाक है। किसी भी राष्ट्र के लिए उचित नहीं। यह चिंता का विषय है कि भारत में मोदी सरकार भारतीय टेक फॉर्म्स को वैसे सपोर्ट नही करती है जैसे चीनी फर्म्स को करती है ऐसा क्यों है?
आज केन्द्रीय कर्मचारियों का सारा डेटा चीन जा रहा है,
• फ़ोन की किट चीन से आती है, हम यहां सिर्फ़ स्क्रू टाइट करते हैं,
• हमारी इकॉनमी का 60% हिस्सा SERVICES पर Based है, जो बहुत ही ख़तरनाक है,
• मोदी सरकार भारतीय टेक फर्म्स को वैसे सपोर्ट नहीं करती, जैसे चाइनीज फर्म्स को करती है,
आइए जानते हैं कुछ महत्वपूर्ण बातें…
- सीसीटीवी कैमरों में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी: भारत में उपयोग होने वाले सीसीटीवी कैमरों में से लगभग 80% के पुर्जे चीन से आते हैं । चीनी कंपनियों जैसे कि Hikvision और Dahua का भारत के सीसीटीवी बाजार में लगभग 30% हिस्सा है ।
- बायोमेट्रिक मशीनों का उपयोग: बायोमेट्रिक मशीनों के उपयोग को लेकर भी चिंताएं हैं, खासकर जब इन मशीनों में व्यक्तिगत डेटा संग्रहित किया जाता है । हालांकि, बायोमेट्रिक मशीनों में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी के बारे में विशिष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं ।
- सरकारी पहल: भारत सरकार ने सीसीटीवी कैमरों के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू किए हैं । अब किसी भी कैमरे की बिक्री से पहले उसका हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सोर्स कोड सरकारी लैब में टेस्ट करना अनिवार्य होगा ।
- चीन से खतरे की आशंका: सरकार की इस पहल के पीछे चीन से खतरे की आशंका है । सरकार का मानना है कि सीसीटीवी जैसे टूल्स के जरिए जासूसी हो सकती है, इसलिए उनकी कड़ी जांच जरूरी है ।
इन नियमों का उद्देश्य देश में साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा को मजबूत करना है । इससे घरेलू उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा और चीन पर निर्भरता कम होगी ।
हमारी इकॉनमी का 60% हिस्सा SERVICES पर Based है, जो बहुत ही ख़तरनाक है,
भारत की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का योगदान लगभग 55-60% है, जो कि एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । यह सेक्टर न केवल देश के सकल घरेलू उत्पाद में योगदान देता है, बल्कि रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है ।
सर्विस सेक्टर के कुछ महत्वपूर्ण पहलू:
- जीडीपी में योगदान: सर्विस सेक्टर भारत के जीडीपी में लगभग 55-60% का योगदान देता है ।
- रोजगार के अवसर: यह सेक्टर रोजगार के अवसर प्रदान करता है, खासकर युवाओं के लिए ।
- विकास का चालक: सर्विस सेक्टर को आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण चालक माना जाता है ।
- विदेशी निवेश: यह सेक्टर विदेशी निवेश को आकर्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।
हालांकि, सर्विस सेक्टर पर अधिक निर्भरता के कुछ खतरे भी हो सकते हैं, जैसे कि
- अस्थिरता: सर्विस सेक्टर की प्रकृति अस्थिर हो सकती है, जो अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है ।
- असमानता: इस सेक्टर में रोजगार के अवसर और आय की असमानता हो सकती है ।
- प्रतिस्पर्धा: वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण इस सेक्टर में दबाव हो सकता है ।
इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को विविध बनाने और अन्य सेक्टर्स को भी बढ़ावा देने पर काम करे, ताकि अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर और समृद्ध हो सके ।
मोदी सरकार ने भारतीय टेक फर्म्स को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख पहलें हैं।
- मेक इन इंडिया: इस पहल का उद्देश्य भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देना है, जिसमें टेक फर्म्स भी शामिल हैं।
- स्टार्टअप इंडिया: इस पहल का उद्देश्य स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना और उन्हें समर्थन प्रदान करना है।
- डिजिटल इंडिया: इस पहल का उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है, जिसमें टेक फर्म्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- आत्मनिर्भर भारत: इस पहल का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना है, जिसमें घरेलू उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है।
हालांकि, यह सच है कि चीनी टेक फर्म्स ने भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है और उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जैसे कि डेटा सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताएं। लेकिन मोदी सरकार ने इन चिंताओं को संबोधित करने के लिए कदम उठाए हैं, जैसे कि डेटा सुरक्षा नीतियों को मजबूत करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना।
भारतीय टेक फर्म्स के लिए समर्थन
मोदी सरकार ने भारतीय टेक फर्म्स को समर्थन देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख पहलें हैं:
- फंडिंग: सरकार ने भारतीय टेक फर्म्स के लिए फंडिंग के अवसर प्रदान किए हैं।
- नियामक सुधार: सरकार ने नियामक प्रक्रिया को सरल बनाने और टेक फर्म्स के लिए समर्थन प्रदान करने के लिए कदम उठाए हैं।
- नवाचार को बढ़ावा: सरकार ने नवाचार को बढ़ावा देने और टेक फर्म्स को समर्थन प्रदान करने के लिए कई पहल की हैं।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की इन पहलों का भारतीय टेक फर्म्स पर क्या प्रभाव पड़ता है और वे कैसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकती हैं।
परवेज़ आलम,
वरिष्ठ पत्रकार स्तंभकार, प्रयागराज उत्तर प्रदेश







