शुभ मुहुर्त पर हुई मां लक्ष्मी व श्रीगणेश की विधि-विधान के साथ पूजा
भदोही। ज्योति का पर्व दिपावली पूरे उमंग-उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। देवालयों व भवनों में लाखों दीप जले। अट्टालिकाएं विद्युत झालरों की रोशनी से जगमगा उठे। रंगीन झालरों की झिलमिलाहट दूर से ही अलैकिक छटा बिखेर रही थी। पटाखे की धूम-धड़ाम चलती रही। लोगों ने शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और श्रीगणेश की विधि-विधान के साथ पूजा कर प्रसाद का वितरण किया।
दिपावली का उत्साह कालीन नगरी में यूं तो धनतेरस से ही शुरु हो गया है। पांच दिवसीय इस रोशनी के पर्व के उमंग में सभी डूब गए हैं। धनतेरस के सुबह से लोग बाजारों में आवश्यक सामानों की खरीदारी में व्यस्थ दिखें। नगर के विभिन्न इलाकों में सजी दुकानों पर भगवान श्रीगणेश-श्रीलक्ष्मी के मूर्तियों की खरीदारी चलती रहीं। प्रतिमाओं के अलावा धान का लावा, लाई, चूड़ा, गट्टा आदि की खरीदारी में लोग व्यस्त रहे। सर्वाधिक भीड़ मिठाइयों की दुकानों में दिखीं। वहीं फूल माला व दीयों की भी बिक्री के लिए सजी रहीं। जहां पर लोगों को फूल माला व दीयों की खरीदारी करते हुए देखा गया। प्रतिष्ठानों व घरों में श्रीगणेश-श्रीलक्ष्मी का शुभ मुहुर्त में पूजा हुई और प्रसाद वितरण किया गया। घरों में लोगों ने स्वयं तो प्रतिष्ठानों में पुजारी बुलाकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान के साथ पूजा कराई। वहीं अपने घरों व प्रतिष्ठानों में असंख्य दीयों को लोगों ने जलाया। कहीं कोई ऐसा कोना नही दिखाई पड़ रहा था जहां अंधेरा रहा हो। मोमबत्ती व मिट्टी के दियों की लै तथा विद्युत झालरों से हर कोना प्रकाशित हो उठा। विद्युत झालरों की झिलमिलाहट देख लोगों की खुशी परवान चढ़ रहीं थी। सिर्फ बड़े भवन व घर नहीं बल्कि मड़हा हो या फिर मिट्टी का मकान व चाहे टीन शेड़ ही क्यों न रहा हो। प्रकाश के पर्व दीपावली पर हर जगह प्रकाश ही प्रकाश नजर आ रहा। यहां तक की खेत-खलिहान और घूर तक में भी दियों के जलने से वहां प्रकाश के अलावा और कुछ नजर नही आ रहा और पटाखे बजते रहे। रातभर धूम-धड़ाम की आवाजें सुनाई देती रही। हालांकि देखा जाए तो पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल काफी कम पटाखे फोड़े गए। महिलाएं व पुरुष तथा बच्चें सभी ने रोशनी के पर्व दीपावली की खुशी मनाई। हर तरफ उल्लास का वातावरण रहा। लोग एक-दूसरे को मिठाई का पैकेट पकड़ाकर दीपावली की बधाई देते रहें।







