हस्ते मुस्कुराते तथा हाथ हिलाते चढ़े वैन मे समर्थको का किया अभिवादन
JALAUN NEWS: 31 साल पुराने डबल मर्डर केस में बसपा के पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान को उम्रकैद की सजा हुई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने गुरुवार को फैसला सुनाया। सजा सुनाए जाने के बाद बाहर निकले पूर्व विधायक ने हाथ हिलाते हुए अपने समर्थकों का अभिवादन किया। पूर्व विधायक ने कहा- वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। 1994 में प्रधानी चुनाव की रंजिश में दो हत्याएं हुई थी। पूर्व विधायक भी इस मामले में आरोपी बनाए गए थे।
कोर्ट में पेश नहीं होने पर सोमवार को ही उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनवीडब्लू) भी जारी किया गया था। गुरुवार को वकील के ड्रेस में पुलिस को चकमा देते हुए वह कोर्ट पहुंचे और सरेंडर कर दिया। 2007-2012 तक बसपा के टिकट पर कालपी विधानसभा सीट से विधायक रहे। इसके बाद 2022 में भाजपा में शामिल हो गए थे।गुरुवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ईसी एक्ट कोर्ट में छोटे सिंह की सजा पर फैसला होना था। सुबह 8 बजे से ही कोर्ट के बाहर एएसपी प्रदीप कुमार वर्मा, सीओ माधवगढ़ अंबुज यादव, कालपी सीओ अवधेश कुमार सिंह, कोंच सीओ परमेश्वर प्रसाद, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा समेत 14 थानों की फोर्स, तैनात थी। योजना थी कि छोटे लाल चौहान को सरेंडर करने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पर छोटे लाल चौहान पुलिस को चकमा देकर सुबह 10:15 बजे वकील के भेष में सफेद शर्ट और काली पैंट पहनकर पहुंच गए। उन्हें अधिवक्ताओं ने घेर रखा था, जिसके कारण पुलिस को भनक नहीं लग सकी। 11 बजे कोर्ट की सुनवाई शुरू हुई। 10 मिनट तक पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान के अधिवक्ता राजेश चतुर्वेदी द्वारा अपना पक्ष रखा गया, साथ ही एक प्रार्थना पत्र भी न्यायाधीश महोदय को दिया गया, इस दौरान अधिवक्ता द्वारा कम से कम सजा दिए जाने की अपील की। दोपहर 12:30 बजे कोर्ट का फैसला आया। जिसमें कोर्ट ने जस्टिस भारतेंदु सिंह की बेंच ने छोटे सिंह चौहान को उम्रकैद की सजा सुनाई।धारा 302 के तहत उम्र कैद, 307 के तहत 10 साल और धारा 147 148 की धारा के तहत 3-3 साल की सजा सुनाई गई।कोर्ट का फैसला सुनते ही छोटे लाल चौहान के चेहरे पर मायूसी साफ देखी गई। हालांकि इसके बाद वे पुलिस कस्टडी में कोर्ट रूम से हाथ हिलाते हुए बाहर निकलते। उन्होंने कहा-मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। मेरे खिलाफ षडयंत्र किया जा रहा है। इस फैसले के खिलाफ मैं हाईकोर्ट जाउंगा। इस दौरान कोर्ट के बाहर छोटे लाल चौहान के 500 समर्थक मौजूद थे।पूरा मामला दो हत्याओ तथा एक हाफ मर्डर का था जिसमे हाफ मर्डर का पीड़ित होसटाईल हो गया था इसके अलावा चार्जशीट मे कुल दस आरोपी थे जिनमे एक आरोपी को सजा हुई तथा नौ लोगो का ट्रायल हाईकोर्ट स्टे समाप्त हो कर होना है। चुर्खी थाना क्षेत्र के बिनौरा बैध गांव में 30 मई 1994 को प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर दोहरा हत्याकांड हुआ था। पीड़ित पक्ष के रामकुमार ने तहरीर में बताया था- दोपहर करीब 11:30 बजे वह अपने भाइयों, परिजनों और ग्रामीणों के साथ मकान के बरामदे में बैठा था। तभी गांव के रुद्रपाल सिंह उर्फ लल्ले गुर्जर, राजा सिंह, संतावन सिंह गुर्जर, करन सिंह उर्फ कल्ले और दो अज्ञात लोग हथियारों से लैस होकर अंदर घुस आए। रुद्रपाल ने साथियों से कहा- “सभी को घेर लो, कोई जिंदा न बच पाए।” इसके बाद अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। इस घटना में राजकुमार उर्फ राजा भैया और जगदीश शरण की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि वीरेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
पुलिस विवेचना में छोटे सिंह चौहान, अखिलेश, कृष्ण मुरारी, बच्चा सिंह और छुन्ना सिंह के नाम भी सामने आए। 18 फरवरी 1995 को इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई। इसी दौरान छोटे सिंह चौहान वर्ष 2007 में बसपा से कालपी विधानसभा के विधायक चुने गए। बाद में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और प्रदेश सरकार तथा राज्यपाल ने धारा 321 सीआरपीसी के तहत उक्त केस वापस ले लिया।







