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झोलाछापों पर स्वास्थ्य विभाग की सख्ती का असर, कार्रवाई के डर से वापस लिए जा रहे प्रमाण पत्र

FATEHPUR NEWS: जनपद में झोलाछाप डॉक्टरों तथा अवैध रूप से संचालित क्लीनिक, अस्पताल और पैथोलॉजी केंद्रों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियान का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। लगातार हो रही जांच और कार्रवाई के चलते कई संचालक, जो कथित रूप से दूसरे व्यक्तियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर स्वास्थ्य संस्थान संचालित कर रहे थे, अब कार्रवाई के भय से उन प्रमाण पत्रों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इसी क्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में एक लिखित प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें एक चिकित्सक ने स्पष्ट किया है कि उसका सुमन पैथोलॉजी से अब कोई संबंध नहीं है। प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि उसकी जानकारी और सहमति के बिना उसके एमबीबीएस डिग्री एवं प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया। आवेदक ने सीएमओ से अनुरोध किया है कि सुमन पैथोलॉजी से उसके नाम और एमबीबीएस प्रमाण पत्र को तत्काल हटवाया जाए। सूत्रों के अनुसार, यह कोई अकेला मामला नहीं है। जिले में ऐसे कई प्रकरण सामने आने की चर्चा है, जिनमें स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बाद संबंधित लोग अपने दस्तावेज और प्रमाण पत्र वापस लेने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे यह भी संकेत मिल रहा है कि कई निजी स्वास्थ्य संस्थान निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित हो रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की लगातार छापेमारी और निरीक्षण अभियान के कारण अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों, अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। विभाग की टीमें विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, दस्तावेजों और अन्य आवश्यक मानकों की जांच कर रही हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यू.बी. सिंह ने बताया कि यदि जांच के दौरान किसी अस्पताल, क्लीनिक या पैथोलॉजी में लगे प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं अथवा किसी चिकित्सक के प्रमाण पत्र का बिना अनुमति उपयोग किया जाना सामने आता है, तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) तथा उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम एवं स्वास्थ्य संस्थान संबंधी प्रचलित नियमों के तहत नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनपद में अवैध एवं मानकों के विपरीत संचालित स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि उपचार के लिए केवल पंजीकृत और अधिकृत चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य संस्थानों का ही चयन करें।