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झाँसी की पहचान वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई से, फिर भी सरकारी कार्यालयों में छायाचित्र का अभाव चिंता का विषय

आसरा एनजीओ की अध्यक्ष पूजा शर्मा व संस्थापक बंटी  शर्मा ने जताई आपत्ति, प्रशासन से की अनिवार्य रूप से चित्र लगाने की मांग
JHANSI NEWS: ऐतिहासिक एवं वीरता की प्रतीक नगरी झाँसी का नाम आते ही सर्वप्रथम स्मरण होता है वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई का, जिन्होंने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय साहस और बलिदान का परिचय देकर न केवल झाँसी, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया। उनकी वीरगाथा आज भी हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति का संचार करती है। लेकिन इसी झाँसी नगरी में, जहां की पहचान ही रानी लक्ष्मी बाई से है, अधिकांश सरकारी कार्यालयों में उनके छायाचित्र का अभाव देखने को मिल रहा है। यह स्थिति न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि कहीं न कहीं हमारी ऐतिहासिक धरोहर और महान विभूतियों के प्रति उदासीनता को भी दर्शाती है। स्थानीय नागरिकों व सामाजिक संगठनों के बीच इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है और इसे गंभीर अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है। इसी संदर्भ में समाजसेवी संस्था “आसरा एनजीओ” की अध्यक्ष पूजा शर्मा एवं संस्थापक बंटी  शर्मा ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जिस वीरांगना के अद्वितीय योगदान के कारण झाँसी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, उनके सम्मान में सरकारी कार्यालयों में उनका छायाचित्र न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि सरकारी कार्यालय आम जनता के लिए प्रेरणा स्थल भी होते हैं, जहां आने-जाने वाले नागरिकों, विशेषकर युवा पीढ़ी को महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा मिलती है। ऐसे में रानी लक्ष्मी बाई का चित्र वहां प्रदर्शित होना न केवल उचित, बल्कि आवश्यक भी है।
आसरा एनजीओ पदाधिकारियों ने कहा कि सभी शासकीय कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर रानी लक्ष्मी बाई का छायाचित्र अनिवार्य रूप से लगाया जाए। इसके लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया जाना चाहिए, ताकि झाँसी की गौरवशाली पहचान को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल न केवल एक औपचारिकता होगी, बल्कि यह हमारे इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रप्रेम के प्रति सम्मान प्रकट करने का माध्यम बनेगी। साथ ही इससे आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली अतीत की जानकारी मिलेगी और उनमें देशभक्ति की भावना भी प्रबल होगी। स्थानीय स्तर पर भी कई नागरिकों ने इस मुद्दे पर अपनी सहमति जताई है और प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक कदम उठाने की अपेक्षा की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस जनभावना को कितनी गंभीरता से लेता है और इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।