कुम्भ मेला क्षेत्र स्थित समाजवादी चिंतन शिविर में गंगा, पर्यावरण और समाजवाद पर विचार गोष्ठीआयोजित-
PRAYAGRAJ NEWS: कुम्भ मेला क्षेत्र में आयोजित समाजवादी चिंतन शिविर के उद्घाटन अवसर पर आज “गंगा, पर्यावरण और समाजवाद” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में समाजवादी चिंतनधारा, पर्यावरण संरक्षण और गंगा की अविरलता–निर्मलता लेकर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अनिल यादव नेकिया।विषय प्रवर्तन अवधेश आनंद संयोजक ने किया। मुख्य अतिथि सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक जीवन की जीवनरेखा है, जिसका संरक्षण समाजवादी मूल्यों से गहराई से जुड़ा हुआ है। श्यामलाल पाल ने डॉ. लोहिया के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने समाजवाद को केवल आर्थिक समानता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे प्रकृति, संस्कृति और समाज के संतुलन से जोड़ा। डॉ. लोहिया का मानना था कि अंधाधुंध औद्योगीकरण और पूंजीवादी विकास मॉडल प्रकृति का शोषण करता है, जिसका सीधा असर समाज के अंतिम व्यक्ति पर पड़ता है। एमएलसी डॉ मानसिंह यादव ने कहा कि गंगा का प्रदूषण केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय का भी प्रतीक है। गंगा के किनारे रहने वाले मछुआरे, किसान, नाविक और श्रमिक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, जबकि निर्णय और लाभ बड़े पूंजीपतियों के हाथों में सिमट जाते हैं। यह स्थिति डॉ. लोहिया के “सप्त क्रांति” के विचारों के विरुद्ध है, जिसमें उन्होंने आर्थिक विषमता और प्रकृति के शोषण के खिलाफ संघर्ष की बात कही थी। वरिष्ठ नेता,विधायक डॉ संग्राम सिंह यादव ने कहा कि समाजवाद का मूल उद्देश्य संसाधनों का समान वितरण और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है, जब विकास की नीतियों में जनहित और प्रकृति को केंद्र में रखा जाए। डॉ. लोहिया का यह विचार आज भी प्रासंगिक है कि विकास का पैमाना केवल उत्पादन और मुनाफा नहीं, बल्कि मानव जीवन की गुणवत्ता और पर्यावरण की सुरक्षा होनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि कुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का महापर्व है, जहां करोड़ों लोग गंगा के साथ अपने भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध को व्यक्त करते हैं। ऐसे में कुम्भ क्षेत्र में समाजवादी चिंतन शिविर का आयोजन यह संदेश देता है कि सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। अंत में यह संकल्प लिया गया कि समाजवादी कार्यकर्ता और आम नागरिक गंगा संरक्षण, पर्यावरण रक्षा और समाजवादी मूल्यों के प्रचार–प्रसार के लिए मिलकर कार्य करेंगे। डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों को आत्मसात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति के बिना समाजवाद अधूरा है और समाजवाद के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव। गोष्ठी का समापन “ समाजवाद बचेगा, तभी समाज बचेगा” के उद्घोष के साथ हुआ।
कार्यक्रम के संयोजक अवधेश आनंद ने अगतुको के प्रति आभार व्यक्त किया तथा संचालन सह संयोजक अनंत बहादुर यादव ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अभिनव प्रकाश ने किया। इस मौके पर श्यामलाल पाल,डॉ संग्राम सिंह यादव, अनिल यादव, डॉ मान सिंह यादव, श्रीमती विजमा यादव, सैयद इफ़्तेख़ार हुसैन, पप्पू लाल निषाद,रविन्द्र यादव, सत्य वीर मुन्ना,बासुदेव यादव,रमाकांत पटेल, कृष्ण मूर्ति सिंह,कामरेड हरिश्चंद्र द्विवेदी,दान बहादुर मधुर, हेमंत टुन्नू,अनंत बहादुर यादव, राघवेंद्र यादव, अमरनाथ मौर्य, संजय मौर्य,शांति प्रकाश पटेल, दूधनाथ पटेल, रमाकांत पटेल, वजीर खान, आर एन यादव, सचिन श्रीवास्तव,मुलायम यादव, जगदीश, खिन्नी लाल पासी, नाटे चौधरी, राम प्रताप,राजेश यादव, सुशील श्रीवास्तव,आदिल हमजा, संगीता पटेल, अचल सिंह, मुन्नाजी, योगेंद्र पाण्डेय, वी वी तिवारी, नरेन्दद्र सिंह, मकबूल अहमद,आसुतोष, नन्दलाल पटेल, संतलाल वर्मा, जय सिंह यादव, रूप नाथ, डॉ हरिप्रकाश यादव,संतोष, देवीलाल, प्रदीप निषाद आदि ने अपने विचार रखे।







