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किसी की मेहरबानी मांगना अपनी आजादी बेचना है, पत्रकार बंधु अनैतिक उपहार से बचें

MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चंद्र पाण्डेय)  ये शब्द राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हैं। उन्होंने कहा था, किसी की मेहरबानी मांगना अपनी आजादी बेचना है। बात शत-प्रतिशत सही है। क्योंकि यही बात गांवों में चर्चित एक कहावत बताती है – “खाता है मुंह, लजाती हैं आंखें”। मेहरबानी किसी भी रूप में हो, उससे पत्रकारों का न तो ईमान डगमगाना चाहिए और न ही उन्हें विचलित होना चाहिए। कर्तव्य में उन्हें एक पक्षीय खबर भूल कर भी प्रकाशित नहीं करनी चाहिए। एक जज साहब ने आपसी बातचीत में कहा, जब मैं डायस पर मुकदमे की सुनवाई करता हूं और जब प्रथम पक्ष अपना बयान दर्ज कराता है तो उसके बयान को सुनकर लगता है कि यह पूरी तरह सत्य बोल रहा है, इसी पर फैसला सुना दूं। लेकिन जब दूसरा पक्ष अपना बयान दर्ज कराता है तो उसका बयान सुनकर ऐसा लगता है कि यही पक्ष सत्य है और प्रथम पक्ष गलत दिखाई पड़ने लगता है। उन्होंने कहा पत्रकारों को बिना दूसरे पक्ष की बात सुने कभी एक पक्षीय खबर नहीं प्रकाशित करनी चाहिए। पत्रकार को शुचितापूर्ण अपना कार्य व सादगीपूर्ण जीवन रखकर जनहित के कार्य में मन से जुड़ना होगा। पूरे देश में हर संस्थान में बिरादरी-वाद हावी है, चाहे वह कोई टेबल हो। किंतु मिर्जापुर कचहरी के अनुभवी युवा अधिवक्ता सतीश चंद्र पांडेय ने कहा दुनिया में सिर्फ पत्रकारिता टेबल ऐसा है जहां कोई वाद नहीं चलता। श्री पांडेय ने कहा पत्रकार बंधुओं को अपनी उक्त गरिमा सदैव बनाए रखनी चाहिए।