बेहतर आमदनी की उम्मीद में किसानों ने लगाई हल्दी
FATEHPUR NEWS: जनपद के देवमई ब्लॉक में किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर हल्दी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। पहले यहां के किसान परंपरागत खेती करते थे। धान, गेहूं और सरसों जैसी फसल उगाते थे। इसमें लागत बढ़ती जा रही थी। आय घट रही थी। हर साल आपदा और फसलों में रोग से हो रहे नुकसान से भी किसान परेशान थे। हल्दी की खेती के लिए यहां की बलुई दोमट मिट्टी और 20-30 डिग्री सेल्सियस का तापमान अनुकूल है।
किसानों के लिए मई से जुलाई का समय बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त होता है। इसमें मध्यम आकार के स्वस्थ और उपचारित प्रकंदों का इस्तेमाल किया जाता है। खेत की तैयारी में गहरी जुताई और जैविक खाद का प्रयोग आवश्यक है। हल्दी की फसल किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद है। इसमें रोग का खतरा कम होता है। आंधी-तूफान और जानवरों से भी फसल सुरक्षित रहती है। साधारण बारिश से फसल प्रभावित नहीं होती। हालांकि अधिक बारिश से फंगस का खतरा रहता है। फसल की कटाई 7 से 9 महीनों में की जाती है। पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। खुदाई के बाद हल्दी से मिट्टी साफ की जाती है। फिर इसे पानी में उबालकर धूप में सुखाया जाता है। बेहतर मूल्य के लिए क्यूरिंग और पॉलिशिंग की जाती है। क्यूरिंग के बाद हल्दी को 15 दिन तक सुखाया जाता है। अंत में या तो हल्दी को पॉलिश किया जाता है या फिर पाउडर बनाकर बाजार में बेचा जाता है।







