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कर्म तथा कर्तव्य के प्रति निष्ठा है प्रभु की आराधना: आचार्य नीरज कृष्ण

भवानीगढ़ में श्रीमदभागवत कथा में कृष्ण जन्मोत्सव के भावपूर्ण प्रसंग पर मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु
PRATAPGARH NEWS: सांगीपुर क्षेत्र के ओझा का पुरवा भवानीगढ़ में हो रही श्रीमदभागवत कथा में मंगलवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। कथाव्यास श्रीधाम अयोध्या से पधारे आचार्य नीरजकृष्ण पाण्डेय जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म धरा से पाप के समूल विनाश के लिए हुआ। उन्होने कहा कि भगवान के जन्म की लीला में संसार को धर्म के पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा मिली। उन्होने कहा कि भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति सदैव मंगलकारी हुआ करती है। आचार्य नीरज कृष्ण जी ने बताया कि जीवन में कर्म और कर्तव्य के प्रति निष्ठा ही सच्ची आराधना है। उन्होने कहा कि मन से भक्त ने जिस भी रूप मे प्रभु को पुकारा, भगवान ने उसकी पुकार सुनी। उन्होने कहा कि सत्य धर्म का अर्थ अनीति के रास्ते से बचते हुए परोपकार है। उन्होने गिरिराज के पूजन की भी मार्मिक कथा सुनाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के मनमोहक भावपूर्ण प्रसंगों पर श्रद्धालु द्वारिकाधीश के जयघोष में मगन हो उठे। हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की के शंखनाद के मध्य भगवान के जन्म पर पुष्पवर्षा भी हुई। कथा के संयोजक समाजसेवी रामकरन ओझा, लक्ष्मी नारायण ओझा एवं राम खेलावन ओझा ने व्यासपीठ का पूजन अर्चन किया। सह संयोजक सुरेन्द्र ओझा बबलू ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इस मौके पर प्रधानाचार्य डॉ0 अमिताभ शुक्ला, चेयरपर्सन प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी, ज्ञानप्रकाश शुक्ला, केके सिंह, राकेश सिंह, रामबोध शुक्ला, अशोकधर द्विवेदी, विकास पाण्डेय, चंदन पाण्डेय, बड़े लाल तिवारी, राजू पयासी, विजय ओझा, वीरेन्द्र ओझा, राघवेंद्र ओझा, उत्कर्ष ओझा, डा0 त्रिभुवन चौबे, अजीत मिश्र आदि रहे।