LAKHIMPUR KHERI NEWS: बज़्म फ़रोगे अदब की तरफ से हर महीने होने वाले तरही मुशायरे की फेहरिस्त में
17वां मुशायरा संपन्न हुआ। मुशायरे की सदारत बज़्म के सदर आमिर रज़ा पम्मी ने की और मेहमाने नफीस वारसी रहे, निज़ामत इलियास चिश्ती ने किया। खीरी कस्बे के मदरसा सुल्ताने हिंद में आयोजित 17वें तरही मुशायरे का नात पाक से किया और आगाज़ करते हुए वसीक रज़ा ने कहा- चेहरा रखूं मैं सामने उनकी है तमन्ना,
करवट भी मुझे वो तो बदलने नहीं देते। मुशायरे की सदारत कर रहे बज़्म के सदर आमिर रज़ा पम्मी ने कहा –
महबूब से मिलने की तलब इतनी है उनको, कंधा भी कहारों को
बदलने नहीं देते। मेहमाने खुसूसी नफीस वारसी ने पढ़ा-
मां बाप से मज़बूत नहीं कोई सहारा, मां-बाप कभी पांव फिसलने नहीं देते।
मुशायरे की निज़ामत कर रहे इलियास चिश्ती ने कहा-
फूलों में तेरा अक्स नज़र आता है मुझको,इस वास्ते फूलों को मसलने नहीं देते।
बज़्म के सीक्रेट्री डॉ एहराज अरमान ने कुछ यूं कहा –
आती है नज़र चांद सितारों की ये साजिश, सूरज को जो रातों में निकलने नहीं देते।
उमर हनीफ कुरैशी ने पढ़ा-
जो अज़्म का सूरज कभी ढलने नहीं देते, दुश्मन को वही लोग संभालने नहीं देते।
सैयद सलमान अहमद रिजवी ने कुछ यूं कहा –
रहजान तो हमें सिर्फ समझते हैं मुसलमान, रहबर है की फ़िरकों से निकलने नहीं देते।
मंसूर मेहवार ने कहा –
जिन पर खुले हुए हैं सवाबों के दरीचे, वो अपने कदम शर में फिसलने नहीं देते।
आसिफ अंसारी ने कहा-
दीवार से टकराता है हर शख्स गली में, कंजूस हैं एक बल्ब भी जलते नहीं देते।
अय्यूब अंसारी ने कहा –
लगते हैं जो हर रोज़ हसीनों के ये मेले,मुझको है रहे राह पर चलने नहीं देते।
हसन अंसारी ने कहा –
हम लोग सिखाते हैं इन्हें प्यार की बातें, हम फोन से बच्चों को बहलने नहीं देते।तरही मुशायरा देर रात कामयाबी के साथ मुकम्मल हुआ।







