क्रमवार की गई कई जायज मुद्दों पर चर्चा
LUCKNOW NEWS: देश भर में 3500 से अधिक सदस्यों वाली आल इंडिया नाबार्ड रिटायर्ड इंप्लाइज के वरिष्ठ एवं अति वरिष्ठ पेंशनर्स और वेल्फेयर असोसिएशन अस्सी वर्ष से अधिक आयु के पारिवारिक पेंशनर्स भारत सरकार और नाबार्ड प्रबंधन द्वारा निम्नलिखित मुद्दों के समाधान में की जा रही अत्यधिक देरी और उदासीन रवैये के विरोध में आंदोलन पर हैं: 1 नवंबर 2017 तक सेवानिवृत्त हुए नाबार्ड भर्ती कर्मचारियों के पेंशन में संशोधन। 11. भारत सरकार द्वारा अनुमोदित पारिवारिक पेंशन में संशोधन और पारिवारिक पेंशन पर निर्धारित अधिकतम सीमा को हटाना। 11 से बीस वर्ष की सेवा के बाद पूर्ण पेंशन प्रदान करना। पेंशन का निर्धारण अंतिम वेतन या 10 महीनों के औसत वेतन- जो भी लाभकारी हो, के आधार पर किया जाए। भारत सरकार ने अपने दिनांक 21 जुलाई 2023 के आदेश द्वारा नाबार्ड भर्ती पेंशनर्स को पेंशन संशोधन से अन्यायपूर्वक वंचित कर दिया तथा नाबार्ड में दो अलग-अलग श्रेणियों के पेंशनर्स बना दिये, जबकि पिछले 43 वर्षों से सभी पेंशनर्स को समान रूप से और बिना किसी भेदभाव के माना जाता रहा है। यह सरकारी आदेश न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि नाबार्ड पेंशन विनियम 1993 का उल्लंघन भी करता है और मंविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के अधिकार” के सिद्धान्त का भी उल्लंघन करता है। सभी पेंशनर्स के व्यवहार सुनिश्चित करना नाबार्ड प्रबंधन का नैतिक दायित्व है। हमारे प्रतिष्ठित निदेशक मंडल द्वारा इस भेदभाव को दूर करने के लिए स्वीकृति दिए जाने के 30 महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रबंधन इस भेदभाव को दूर नहीं कर पाया है। भारत सरकार द्वारा अनुमोदित पारिवारिक पेंशन संशोधन को लागू करने तथा आरबीआई के अनुरूप पारिवारिक पेंशन की अधिकतम सीमा हदाने में भी अत्यधिक विलंब हो रहा है। अत्यंत वृद्ध पारिवारिक पेंशनर्स वर्तमान में इतनी कम पेंशन पर जीवनयापन कर रहे हैं जो न्यूनतम जीविका स्तर से भी नीचे है। सरकार द्वारा मंजूरी दिए जाने के 30 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पारिवारिक पेंशन में संशोधन नहीं होने के कारण ये परिवार पेंशनर्स गंभीर आर्थिक संकट झेल रहे हैं।
प्रबंधन की यह असंवेदनशीलता इन असहाय बुजुर्गो में व्यापक निराशा उत्पन्न कर रही है। नाबार्ड में परिवार पेंशन की अधिकतम सीमा जत्यंत चिंताजनक रूप से कम है, जबकि हमारी संदर्भ संस्था आरबीआई, समस्त बैंकिंग उद्योग तथा आरआरबी में परिवार पेंशन पर कोई सीमा नहीं है। प्रबंधन अब तक इस सीमा को हटाने में विफल रहा है। बीस वर्षों की सेबा के बाद पूर्ण पेंशन प्रदान करने और अंतिम वेतन / 10 महीने के औसत वेतन जो भी लाभकारी हो के आधार पर पेंशन तय करने के दोनो मुद्दों पर भी वर्षों से कोई प्रगति नहीं हुई है, जबकि हमारी संदर्भ संस्था इसे काफी पहले लागू कर चुकी है। यह स्थिति नाबार्ड के सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों में घोर निराशा और असंतोष का भाव उत्पन्न कर रही है। अब हमारे पास सड़कों पर उत्तरकर संवन्धित निर्णयकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है और इसी उद्देश्य से निम्नलिखित आंदोलन शुरू किया गया है: कार्यक्रम दिनांक 05.12.2025 लंबित पेंशन संबंधी मुद्दों के शीघ्र समाधान के लिए लंच आवर्स में मुख्यालय में नाबार्ड के अध्यक्ष प्रभारी अधिकारी को सामूहिक और क्षेत्रीय कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। 12.12.2025 शीघ्र समाधान के लिए नाबार्ड के निदेशक मंडल को सौंपा। 19.12.2025 मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय में गेट डेमोस्ट्रेशन और मीडिया ब्रीफिंग।
जनवरी की 5 तारीख से सभी पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स द्वारा मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय के सामने धरना। यदि इसके बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा, जिसमें संसद के समक्ष धरना और नाबार्ड के सत्तर और अस्सी वर्ष आयु वाले वरिष्ठ पेंशनर्स द्वारा अनशन शामिल हो सकता है।







