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आयाम-ए-फ़ातिमा की मजलिस में जलता दरवाज़ा, टूटी पसलियाँ…के मसाइब सुनकर रोने लगे अज़ादार

MIRZAPUR NEWS: (शाहिद वारसी) इमामबाड़ा स्थित गैबीघाट शिया मस्जिद में मंगलवार की देर रात आयाम-ए-फ़ातिमा की पुरख़लूस मजलिस का एहतमाम किया गया। मजलिस की सदारत तनवीर रज़ा ने की। मजलिस में 3 जमादी-उल-सानी को सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शहादत का बयान सुनकर अज़ादारों की आंखे अश्कबर हो गईं । मौलाना हाफ़िज़ हसन रज़ा बनारसी ने बयान करते हुए कहा कि अहलेबैत की सरताज, सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा स.अ., जो बिन्त-ए-रसूल (स.अ.व) और ज़ौजा-ए-मुर्तज़ा अली (अ.स) थीं । उन पर ऐसे सितम किए गए जिन्हें सुनकर दिल काँप उठता है। ये वह हस्ती थीं जिनके घर को बैत-उन-नुबूवत’ कहा गया। वह बेटी जिनके बारे में रसूल-ए-खुदा ने फ़रमाया कि फ़ातिमा मेरे जिगर का टुकड़ा है लेकिन फिर भी उन पर ऐसे जुल्म ढाए गए कि आसमान तक रो पड़ा। उन्होंने कहा कि बीबी ज़हरा स.अ. के घर के दरवाज़े को आग लगाई गई। जालिमों ने जलता हुआ दरवाज़ा धक्का देकर उन पर गिराया। दरवाज़े की चपेट में आकर बीबी की पसलियाँ टूट गईं और नन्हे मासूम मोहसिन (अ.स)शहीद हो गए। जालिमों ने बिन्त-ए-नबी को भी नहीं बख्शा।  सैय्यदा फातिमा जहरा सलामुल्लाह अलैहा पर हुए जुल्म आज भी दिलों को चीरती है। सदियों पुराने दर्द को आज अज़ादार याद करके बिलख बिलख रोते है।
मजलिस में सोज़ख़्वानी आले अहमद बेग मिजराब मिर्जापुरी ने की। नौहाख़्वानी सैय्यद मासूम रज़ा कर्बलाई व पेशख़्वानी आदिल मिर्जापुरी ने अंजाम दी। हर नौहा और हर सोज़ ने माहौल को गमगीन कर दिया।