LAKHIMPUR KHERI NEWS: आज मैं अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करना चाहता हूँ एक ऐसा अनुभव जिसने मुझे न केवल स्वस्थ किया बल्कि मेरे भीतर जिला अस्पताल और वहाँ की चिकित्सा सेवाओं के प्रति गर्व और सकारात्मकता भी भर दिया।कुछ समय पहले मुझे गॉलब्लैडर स्टोन की समस्या हुई। लगातार दर्द और असुविधा के कारण मुझे ऑपरेशन की सलाह दी गई। पहले मन में एक संशय था कि क्या जिला अस्पताल में ऑपरेशन कराना सुरक्षित रहेगा।मेरे एक मित्र की सलाह पर जब मैंने वहाँ जाकर देखा और डाक्टर से वार्ता हुई तो मेरा पूरा दृष्टिकोण ही बदल गया।जिला अस्पताल ओयल की साफ-सुथरी व्यवस्था, समय पर जांच, और डॉक्टरों का आत्मीय व्यवहार देखकर मन को भरोसा हुआ।मुझे हमारे मित्र एपी सिंह ने वहाँ के सर्जन एवं इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, डॉ. ललित वर्मा (एम.बी.बी.एस., एम.एस.) से मिलवाया गया। उन्होंने मेरे केस को गंभीरता से समझा और बहुत सहजता से सारी प्रक्रिया समझाई।शायद पहले से मेरे मन में सरकारी अस्पताल के प्रति नकारात्मकता भरी हुई थी कि इलाज सही नहीं होता है और एक छोटा अनुभव साल 2002 में एक सरकारी अस्पताल का था जो हमें डरा भी रहा था किंतु डाक्टर सर्जन की आत्मविश्वास भरी बातें और शांत स्वभाव ने मुझे सर्जरी के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया।ऑपरेशन का दिन मेरे लिए बेहद अहम था। ई एम ओ सर्जन डाक्टर ललित वर्मा ने एकबार फिर हाल चाल जाना और पूरा भरोसा दिलाया पूरा स्टाफ समय पर मौजूद था। डॉ. वर्मा और उनकी सर्जिकल टीम ने अत्यंत कुशलता से ऑपरेशन किया। यह एक क्रिटिकल केस था, लेकिन उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ इसे सफलता पूर्वक संपन्न किया। ऑपरेशन के बाद की देखभाल ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया ऑपरेशन के बाद मुझे आई सी यू में ले जाया गया जहां स्टाफ ने हर पल ध्यान रखा, जांच की गई, दवाओं का ध्यान, और नर्सिंग स्टाफ का आत्मीय व्यवहार देखकर लगा कि सच में यहाँ सेवा ही धर्म है।मेरे साथ ही उसी समय सर्जिकल वार्ड में एडमिट शिवम् का पित्ताशय (गॉलब्लैडर), मोहम्मद नासिर की किडनी, का सफल ऑपरेशन किया गया। मोहम्मदी सराय के मशरूफ उर्फ मशरूर अली ने अपना अनुभव भी शेयर करते हुए बताया था,”मुझे फैसुला जैसी गंभीर समस्या थी जिसको लेकर कई बाहर कई जगहों दिखाया पर पैंतालीस हजार रुपए खर्च हुए किंतु नतीजा शून्य था परेशानी अधिक बढ़ने पर उन्होंने जिला अस्पताल का रुख किया जहां नाममात्र के खर्च में स्वस्थ होकर अपने घर गए। इन लोगों के साथ ही अन्य कई लोगों के सफल ऑपरेशन हुए थे। इमरजेंसी मरीजों की देखभाल में हर पल डाक्टर आत्मीयता के साथ अपनी सेवा देते नजर आए।यह अपने आप में बताता है कि हमारे जिले के जिला अस्पताल में भी चाहे इमरजेंसी हो या कोई गंभीर बीमारी, अब अच्छी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है।आज अस्पताल से डिस्चार्ज हुए मात्र तीन दिन ही हुए है, मैं अपने को स्वस्थ महसूस कर रहा हूँ, पीछे मुड़कर देखता हूँ तो महसूस करता हूँ कि अगर मैंने निजी अस्पताल का रुख किया होता, तो न केवल खर्च अधिक होता बल्कि इस आत्मीय देखभाल का अनुभव भी शायद नहीं मिलता और सरकारी अस्पताल चिकित्सा के प्रति नकारात्मकता बनी रहती।यहाँ की सबसे बड़ी खूबी जो मैने अनुभव किया, यह है कि डॉक्टर और स्टाफ सिर्फ इलाज नहीं करते, बल्कि मानवता के साथ सेवा करते हैं।एक मरीज के रूप में मेरा अनुभव तो यही कहता है अगर सर्जरी या किसी गंभीर इलाज की जरूरत हो, तो जिला अस्पताल ओयल मोतीपुर जरूर जाएं। यहाँ कम खर्च, भरोसे, अनुभव और संवेदनशीलता सभी एक साथ देखने को मिलते है।आज मुझे सच में गर्व है कि हमारे जिले में ऐसा अस्पताल है जहाँ हर मरीज को समान रूप से देखभाल, सुरक्षा और सम्मान मिलता है।एक मरीज के रूप में मेरा अनुभव है। मेरे पास शब्द नहीं की मैं कैसे धन्यवाद दूं डाक्टर वर्मा और अस्पताल प्रशासन को जो यह साबित करता है कि जिला अस्पताल ओयल मोतीपुर अब जनविश्वास पर खरा उतरने लग रहा है।







