शरीफ मंज़िल में अशरा ए अरबईन की मजलिसें शुरू
ETAWA NEWS: स्थानीय सैदवाड़ा स्थित शरीफ मंजिल में राहत अक़ील व शब्बर अक़ील की ओर से अशरा ए अरबईन की दस दिवसीय मजलिसों की श्रंखला में पहली मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में तक़रीर करते हुए मुजफ्फर नगर से आए मौलाना मुज़फ्फर हसनैन जैदी ने कहा पूरी कायनात में इमाम के बगैर कोई भी इंसान नहीं रह सकता। हम उसे इमाम मानते हैं जिन्हें रसूल अल्लाह ने ग़दीर के उजाले में सवा लाख हाजियों और सहाबियों के सामने यह कहकर पहचनवाया कि जिस जिस का मैं मौला उस उस के अली मौला। हम रसूल की सुन्नत पर अमल करके अली को अपना इमाम मानते हैं। मौला अली के चाहने वाला वही है जो किसी मोमिन का दिल न दुखाये क्योंकि मोमिन के दिल मे अली की मोहब्बत होती है। मौलाना मुजफ्फर जैदी ने कहा दुनिया का ऐसा कोई मसला नहीं जिसका जवाब अली के पास न हो। अली इल्म के बादशाह हैं। इसीलिए रसूल ने फरमाया मै शहरे इल्म हूं अली उसका दरवाजा हैं। अली फरमाते हैं कि अल्लाह ने रिसालत की गवाही में मुझे शामिल किया। मजलिस में तसलीम रज़ा, तहसीन रज़ा, ज़हूर नक़वी ने सोजख्वानी की, खुर्शीद जाफ़री, सलमान रिज़वी, कैफ वारसी, तालिब रिज़वी, अर्श, मोहम्मद, मो. सादिक़, वली ने कलाम पेश किए और अख्तर अब्बास रिज़वी मोंटू, तनवीर हसन, राहिल सगीर, तसलीम रज़ा ने नोहाख्वानी की। मजलिस में अल्हाज कमर अब्बास नकवी करबलाई, शावेज़ नक़वी, मुशीर हैदर, मो. मियां, मो. अब्बास, अयाज हुसैन, राहत हुसैन रिज़वी, नजमुल हसन, सलीम रज़ा, ताजदार हुसैन, सुहेल अली, जुनैद सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।







