भले ही सरकार के लिए इस उद्योग का टर्नओवर छोटा हो, लेकिन इससे जुड़े लोगों की संख्या है बहुत बड़ी
BHADOHI NEWS: कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के प्रशासनिक समिति सदस्य संजय गुप्ता ने अमेरिका द्वारा भारतीय कालीन उद्योग पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ पर चिंता जताई है। उन्होंने गोपीगंज के होटल ग्लोबल स्टार में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस कदम से कालीन उद्योग गंभीर संकट में पड़ सकता है। इस दौरान गुप्ता ने कहा कि भारत से होने वाले कुल 16 हजार करोड़ रुपए के कालीन निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत यानी 9 हजार करोड़ रुपए है। इस 9 हजार करोड़ रुपए के व्यापार से जुड़े 13 लाख बुनकर और श्रमिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। टैरिफ बढ़ने से इनकी आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने बताया कि टैरिफ का असर पहले से ही दिखने लगा है। तीन महीने का समय मिला था और उम्मीद थी कि इस बीच कोई समझौता होगा। लेकिन टैरिफ कम होने की बजाय 25 से बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया। श्री गुप्ता ने कालीन उद्योग की विशेषता बताते हुए कहा कि 8 हजार करोड़ के टर्नओवर वाली अन्य उद्योग में 300 लोगों को रोजगार मिलता है। वहीं स्टील कंपनियां 10 हजार करोड़ के टर्नओवर में 1000 लोगों को रोजगार देती हैं। जबकि कालीन उद्योग 16-17 हजार करोड़ रुपए के टर्न ओवर में कुल 30 लाख लोगों को रोजगार देता है। सीईपीसी के सदस्य ने सरकार से इसके लिए कोई रास्ता निकालने की बात कहीं। उनका कहना है कि सरकारी सहायता के बिना यह उद्योग खत्म हो सकता है। भले ही सरकार के लिए इस उद्योग का टर्नओवर छोटा हो। लेकिन इससे जुड़े लोगों की संख्या बहुत बड़ी है।







