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अभी तो जनपद को पढ़ रही हैं अपर्णा रजत कौशिक समयानुसार दिखाएंगी अपनी हनक

MIRZAPUR NEWS:  (अमरेश चन्द्र पाण्डेय)  नयी पुलिस कप्तान अपर्णा रजत कौशिक के फरमान सुनकर जनपद के समस्त थानेदार भयभीत है, इस भय से कब किसका विकेट गिर जाए । सभी थानेदार अपने थाने के अभिलेखों को चुस्त दुरुस्त करने में लग गए है। उन्हें पता है कि कप्तान साहब सिर्फ अभिलेखों को देखेगी। लेकिन वो भूल गए है वो ऐसे ऐसे अभिलेखों को देख रही है, जिसकी ओर कभी किसी कप्तान ने झांका तक नहीं । लगे हाथ वे यह भी देख रही है, पूर्व में कितने अपराध ऐसे है जिसका खुलासा अब तक नहीं हुआ और क्यों नहीं हुआ! नए कप्तान से जनपद वासियों को अपेक्षा है कि वो थाने की कमान सुयोग्य व काबिल दरोगाओं को ही सौंपेगी, जिससे थानों पर नतीजे बेहतर मिलेंगे और जनता संतुष्ट होगी। अब तक पिछले कप्तानों से सेटिंग रखने वाले मिठाई व अटैची की संस्कृति पर विश्वास रखने वाले थानेदारों के चेहरे पर बारह बज रहा है।क्योंकि सोमेन वर्मा के चले जाने से सबकी सेटिंग का गुण गोबर हो गया है। जनता को विश्वाश है कि सेटिंग वाले कविरा की भर्ती पर कप्तान पुर्ण विराम लगा देगी। सभी थानेदार कप्तान साहब को अपना कार्य दिखाने के बजाय अपना चेहरा दिखाने में ज्यादा विश्वास रख रहे है और कप्तान के आवास पर गिद्ध की तरह चुपके से मंडराना शुरू किए है। इनसे पूछा जाना चाहिए कि वे थाना छोड़कर अनावश्यक उनके आवास का चक्कर क्यों लगा रहे है। यह निश्चित है कि महिला से जुड़े अपराधों पर कप्तान का फोकस ज्यादा रहेगा। इसीलिए यह देखना भी आवश्यक हैं कि उन्हें खुश करने के लिए कहीं थानेदार निर्दोष लोगों को जेल भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री न कर ले। थानों में कारखास का पद क्या होता है,इसे किसने ईजाद किया और थानों में इनका काम क्या होता है। इसपर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। क्योंकि इन कारखसो से सभी थाने की व्यवस्था चरमरा रही हैं । पहले प्रत्येक थानों का एक कारखास रहता था। अब थानों में जितने हल्के है उतने कारखास नियुक्त है। थानों के थानेदार अब दो हाथ से नहीं चार चार हाथ से थानों को लूट रहे हैं। कारखासो को बिना देर किए पुलिस लाईन बुला लेना चाहिए और कारखसी पर रोक लगा देना चाहिए। थानों पर फरियादियों के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले दरोगाओं विशेषकर लट्ठबाज व गालीबाज दरोगाओं को भी जो पुलिस की छवि बिगाड़ते हैं जनता और पुलिस के आपसी विश्वास के प्रति खाई पैदा करते है। उन्हें भी पुलिस लाइन बुला लेना चाहिए। महंगाई को देखते हुए थानों की पुलिस ने अपना रेट बढ़ा दिया है। अब कोई पुलिसकर्मी पांच सौ का नोट नही पकड़ रहा है। उसे यह नोट छोटी लगने लगी है। किसी के खूंटा हटवाने-गढ़वाने का रेट, मड़ई हटवाने लगवाने का रेट,नाद चन्नी रखवाने का रेट, किसी की जमीन कब्जा कराने, बेदखल कराने आदि सबका रेट अलग-अलग है। सभी थानों की रेट लिस्ट थानों के गेट पर टगवाने की मांग जनता ने कप्तान साहब से की है। जिससे जनता को सुविधा हो व अपनी जेब चुस्त दुरुस्त करके ही थाने पर जाए। लगभग बारह-तेरह वर्ष की सेवा की अनुभवी व सख्त मिजाज पुलिस कप्तान अफसर अपर्णा रजत कौशिक धीरे धीरे सबकी हेकड़ी निकालेगी। अभी तो वे जनपद व जनपद की पुलिस को पढ़ रही है। बाद में वे अपनी असली हनक दिखाएगी।