मजलिस में तक़रीर करते मौलाना सैयद हैदर मौलाई
ETAWA NEWS: पक्की सराये स्थित बड़े इमामबाड़े में नोहाख़्वान तसलीम रज़ा और रियाज़ अब्बास की ओर से शहीदाने कर्बला की याद में मजलिसों का आयोजन किया गया। मजलिस में तकरीर करते हुए मौलाना सैयद हैदर मौलाई जारचवी ने कहा अल्लाह फरमाता है कि खाना पाक होगा तो नस्लें वफादार होगी। जनाबे अबु तालिब ने अपने बच्चों की खून पसीने की कमाई से परवरिश की। अबू तालिब ने जिनकी परवरिश की वो बहादुर और वफ़ादार निकले। अल्लाह फरमाता है हमने तुम्हे पाक गिजा अता की अगर खाना पाक होगा तो नस्लें भी बेहतर होंगी। उन्होंने कहा कि मौला अली ने अल्लाह से कर्बला के लिए एक बहादुर बेटे की तमन्ना की तो अल्लाह ने अली को अब्बास जैसा बेटा दिया। अली ने अलमदार मांगा और उम्मुल बनीन ने अब्बास को बफादार बनाया। मजलिस में तक़रीर करते हुए मौलाना मो. हुसैन हुसैनी मुजफ्फरनगर ने कहा इमाम रिज़ा को मशहद के बादशाह ने मदीने से तलब किया। जब इमाम अकेले मशहद ईरान पहुंचे तो हुकूमत किसी और की थी इमाम ने कहा कल यहां मेरी हुकूमत होगी मेरा सिक्का चलेगा। धीरे धीरे बादशाह के दरबार से भीड़ कम होने लगी और लोग इमाम के पास आने लगे। यह नजारा बादशाह को बर्दाश्त नहीं हुआ और इमाम रिज़ा को जहर दिलवाकर शहीद करा दिया। आज ईरान के मशहद में इमाम रिज़ा की हुकूमत है और उन्हीं का सिक्का चल रहा है। मजलिसों में तसलीम रज़ा, सलीम रज़ा, ज़हूर नक़वी ने सोजख्वानी की, मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी, अश्शू रिज़वी, सलमान रिज़वी, आबिद रज़ा ने कलाम पेश किए और सलीम रज़ा, तनवीर हसन व राहिल सगीर ने नोहा ख़्वानी की। शावेज़ नक़वी ने बताया कि इसके अलावा दरगाह मौला अब्बास महेरे पर जफ़र हुसैन शानू, इमामबाड़ा अज़मत अली पर जुबैर हुसैन रिज़वी की ओर से भी मजलिसों का आयोजन किया गया।





