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अपहरण कांड: 6 घंटे में पुलिस ने बरामद किया बच्चा, ममेरा भाई निकला मास्टरमाइंड

PRATAPGARH: एक सनसनीखेज घटना ने प्रतापगढ़ के नवाबगंज थाना क्षेत्र को हिलाकर रख दिया, जब 18 जून 2025 की रात एक 10 वर्षीय बालक के अपहरण की खबर ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। लेकिन प्रतापगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी कुशलता ने इस मामले को मात्र 6 घंटे के भीतर सुलझा लिया। अपहृत बच्चे को सकुशल बरामद करने के साथ-साथ पुलिस ने अपहरण के मास्टरमाइंड, बच्चे के ममेरे भाई शिवम पटेल को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना न केवल अपराध की साजिश का खुलासा करती है, बल्कि रिश्तों में छिपे विश्वासघात की एक दुखद कहानी भी सामने लाती है। घटना की सिलसिलेवार जानकारी 19 जून को प्रेस कांफ्रेंस में अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी संजय राय ने मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि 18 जून 2025 की रात करीब 8 बजे, नवाबगंज थाना क्षेत्र के जुगई का पुरवा, कड़रौ निवासी एक व्यक्ति ने थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनका 10 वर्षीय बेटा लापता है। इससे पहले कि परिवार इस सदमे से उबर पाता, रात 11:11 बजे वादी के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन पर अज्ञात व्यक्ति ने गाली-गलौज करते हुए कहा, तुम्हारा बेटा मेरे कब्जे में है। सुबह तक 5 लाख रुपये की व्यवस्था कर दे, वरना उसकी हत्या कर दूंगा। यह धमकी सुनकर परिवार दहशत में आ गया। वादी की तहरीर के आधार पर नवाबगंज थाने में मुकदमा संख्या 87/25, धारा 137(2), 140(2), 351(4), 352 बीएनएस के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उनके कुशल निर्देशन में अपहृत बालक की बरामदगी और अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गईं। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी संजय राय और क्षेत्राधिकारी कुण्डा अमरनाथ गुप्ता के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह और स्वाट टीम प्रभारी सुनील कुमार यादव के नेतृत्व में ऑपरेशन शुरू हुआ।
    पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण, और खुफिया सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी। संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की सघन चेकिंग के साथ-साथ डिजिटल और इनपुट-बेस्ड ट्रेसिंग का सहारा लिया गया।
बच्चा बरामद, अभियुक्त गिरफ्तार
पुलिस की अथक मेहनत और तकनीकी विशेषज्ञता का नतीजा 19 जून 2025 की सुबह सामने आया। नवाबगंज थाना क्षेत्र के चैनी के पुरवा के पास नहर की पटरी पर पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़ा, जिसकी पहचान शिवम पटेल (22 वर्ष), पुत्र रामकुमार पटेल, निवासी जुगई का पुरवा, कड़रौ के रूप में हुई। उसके कब्जे से अपहरण में प्रयुक्त पल्सर मोटरसाइकिल, एक आईफोन 14, और सिम कार्ड बरामद किया गया। सबसे राहत भरी खबर यह थी कि अपहृत 10 वर्षीय बालक को सकुशल बरामद कर लिया गया। पुलिस ने अभियुक्त को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, जिसमें सनसनीखेज खुलासे हुए।
   कर्ज और लालच ने बनाया अपराधी
पूछताछ में शिवम पटेल ने बताया कि वह परियावां बाजार में एक कॉस्मेटिक की दुकान चलाता है, जिसे शुरू करने में 13 लाख रुपये की लागत आई थी। इसमें से 6 लाख रुपये उसने स्वयं सहायता समूह से ऋण लिया था, जिसे वह समय पर चुका नहीं पाया। कर्ज के बोझ तले दबा शिवम ने अपने दोस्त रितिक यादव, पुत्र लालचन्द्र यादव, निवासी लरू, थाना कुण्डा (वर्तमान में मुंबई निवासी) के साथ मिलकर अपहरण और फिरौती की साजिश रची। रितिक की बहन की शादी के लिए भी पैसों की जरूरत थी, जिसने इस साजिश को और हवा दी।
शिवम ने खुलासा किया कि अपहृत बच्चा उसका ममेरा भाई है। उसने बच्चे को बहला-फुसलाकर अपनी पल्सर मोटरसाइकिल पर बिठाया और रात में उसे रितिक के घर ले गया। फिरौती की कॉल स्वयं शिवम ने नहीं की, क्योंकि उसे डर था कि उसकी आवाज उसके मामा (वादी) पहचान लेंगे। इसलिए, उसने अपने आईफोन 14 से रितिक को कॉन्फ्रेंस कॉल पर लिया और रितिक के जरिए 5 लाख रुपये की फिरौती मांगी। धमकी भी रितिक से ही दिलवाई गई। योजना के मुताबिक, शिवम बच्चे को लेकर परियावां रेलवे स्टेशन के रास्ते मुंबई भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने उसकी मंशा पर पानी फेर दिया। इस ऑपरेशन की सफलता में प्रतापगढ़ पुलिस की तकनीकी दक्षता और समन्वित प्रयासों की बड़ी भूमिका रही। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सर्विलांस, और डिजिटल साक्ष्यों का उपयोग कर संदिग्ध की लोकेशन ट्रेस की। स्वाट टीम और नवाबगंज थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दी। पुलिस टीम में शामिल थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, उपनिरीक्षक गुलाब सिंह, शिशिर पटेल, आदित्य पांडेय, शिवम त्रिपाठी, हेड कांस्टेबल शिशुपाल सिंह, कांस्टेबल रमेश चंद्र, विपिन चौधरी, और चालक दुर्बीन सिंह के साथ-साथ स्वाट टीम के प्रभारी सुनील कुमार यादव, उपनिरीक्षक दिनेश सिंह, हेड कांस्टेबल मोहित राज यादव, और कांस्टेबल जागीर सिंह, राजेंद्र कुमार, आशुतोष पांडेय, अरविंद दुबे ने इस मिशन को अंजाम दिया। यह घटना न केवल एक अपराध की कहानी है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों में बढ़ते अविश्वास को भी उजागर करती है। अपने ही ममेरे भाई द्वारा बच्चे का अपहरण और फिरौती की मांग का मामला समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। कर्ज और आर्थिक दबाव के चलते अपराध की ओर बढ़ते कदम युवाओं के लिए एक सबक हैं। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर एक मिसाल कायम की है, जो अन्य अपराधियों के लिए भी चेतावनी है। गिरफ्तार अभियुक्त शिवम पटेल के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है। पुलिस रितिक यादव की तलाश में मुंबई और अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। बरामद मोटरसाइकिल, मोबाइल, और सिम को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस साजिश में और कोई शामिल तो नहीं था। प्रतापगढ़ पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने एक मासूम की जिंदगी बचाई और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। यह मामला समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि आर्थिक तंगी और लालच किस तरह इंसान को अपराध की राह पर धकेल सकते हैं। साथ ही, यह पुलिस की सजगता और तकनीकी कौशल का एक जीवंत उदाहरण है। प्रतापगढ़ पुलिस की इस उपलब्धि की जितनी सराहना की जाए कम है।