वरिष्ठ शायर जफर मिर्जापुरी की याद में सजी मुशायरे की महफिल
मीरजापुर। वरिष्ठ शायर जफर मिर्जापुरी की याद में एक कवि गोष्ठी व मुशायरे का आयोजन उनके बड़े सुपुत्र तारिक जफर के निवास पर किया गया। इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर मोहिब मिर्जापुरी ने की, जबकि संचालन खुर्शीद भारती ने किया।
इस मौके पर जफर साहब के सरल, मिलनसार और सभी से मोहब्बत करने वाले व्यक्तित्व को याद करते हुए उनकी शायरी की प्रशंसा की गई। संचालक खुर्शीद भारती ने उनका एक शेर पढ़कर सुनाया। किस्मत में ताजदार बनाया नहीं मगर,कहने को तो मुझे भी जफर कह दिया गया।
उनके पौत्र अयान तारिक ने जफर मिर्जापुरी की एक गजल सुनाई। इसके बाद मुशायरे का दौर शुरू हुआ, जिसमें सबसे पहले सैफ रजा ने नातिया कलाम सुनाकर महफिल का आगाज किया। तारिक जफर के बेटे ने अपने दादा जफर मिर्जापुरी की गजल सुनाकर वाहवाही लूटी। इस मौके पर इरफान कुरैशी, फरहान अफजल, कैफियात मिर्जापुरी, दानिश जैदी, खुर्शीद भारती और मोहिब मिर्जापुरी ने अपनी शायरी से महफिल को रौनक बख्शी।
इस मौके पर जफर साहब के सरल, मिलनसार और सभी से मोहब्बत करने वाले व्यक्तित्व को याद करते हुए उनकी शायरी की प्रशंसा की गई। संचालक खुर्शीद भारती ने उनका एक शेर पढ़कर सुनाया। किस्मत में ताजदार बनाया नहीं मगर,कहने को तो मुझे भी जफर कह दिया गया।
उनके पौत्र अयान तारिक ने जफर मिर्जापुरी की एक गजल सुनाई। इसके बाद मुशायरे का दौर शुरू हुआ, जिसमें सबसे पहले सैफ रजा ने नातिया कलाम सुनाकर महफिल का आगाज किया। तारिक जफर के बेटे ने अपने दादा जफर मिर्जापुरी की गजल सुनाकर वाहवाही लूटी। इस मौके पर इरफान कुरैशी, फरहान अफजल, कैफियात मिर्जापुरी, दानिश जैदी, खुर्शीद भारती और मोहिब मिर्जापुरी ने अपनी शायरी से महफिल को रौनक बख्शी।