National
सियासत बदली, रिश्ते नहीं: फतेहपुर में आज भी कायम शास्त्री परिवार का जुड़ाव
फतेहपुर। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन को याद करते हुए फतेहपुर से उनके परिवार के दशकों पुराने जुड़ाव की चर्चा भी अहम हो जाती है। यह रिश्ता केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ राजनीतिक संपर्क, सामाजिक सरोकार, आत्मीयता और जनसेवा के रूप में आगे बढ़ता रहा। फतेहपुर की सियासत में शास्त्री परिवार का नाम आज भी पुराने रिश्तों और उस दौर की राजनीतिक स्मृतियों से जुड़ा हुआ है।
फतेहपुर और शास्त्री परिवार के रिश्ते की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ज्येष्ठ पुत्र स्वर्गीय हरिकृष्ण शास्त्री से हुई, जिन्हें स्थानीय लोग आत्मीयता से ‘हरी भैया’ के नाम से जानते थे। हरिकृष्ण शास्त्री फतेहपुर से सांसद निर्वाचित हुए और बाद में केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। सांसद के रूप में उनका क्षेत्र से सीधा जुड़ाव रहा और लोगों के साथ संवाद उनकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। यही वजह रही कि उनका संबंध फतेहपुर के लोगों से केवल जनप्रतिनिधि और मतदाता का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आत्मीयता का भी बन गया। हरी भैया के निधन के बाद भी फतेहपुर से शास्त्री परिवार का रिश्ता खत्म नहीं हुआ। उनकी पत्नी स्वर्गीय विभा शास्त्री से भी स्थानीय लोगों का संपर्क और आत्मीयता बनी रही। परिवार के सुख-दुख में लोगों की भागीदारी और लोगों के प्रति अपनापन इस रिश्ते को राजनीतिक दायरे से आगे ले गया। इसके बाद हरी भैया के ज्येष्ठ पुत्र विभाकर शास्त्री ने भी फतेहपुर की राजनीतिक जमीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। चुनावी राजनीति में उन्हें अपेक्षित सफलता भले नहीं मिली, लेकिन जनपद के लोगों के बीच उनके प्रति स्नेह और सहयोग का भाव बना रहा। इससे यह संदेश भी सामने आया कि चुनावी परिणाम किसी राजनीतिक यात्रा का एक पड़ाव हो सकते हैं, लेकिन वर्षों में बने सामाजिक रिश्ते उससे कहीं अधिक स्थायी होते हैं। अब शास्त्री परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में विराज शास्त्री फतेहपुर से अपने पारिवारिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं। जनसेवा, सामाजिक गतिविधियों और जनसंपर्क के माध्यम से उनका लोगों से संवाद बढ़ा है। युवाओं और स्थानीय सामाजिक समूहों के बीच उनकी सक्रियता को शास्त्री परिवार के पुराने रिश्ते को नई पीढ़ी से जोड़ने वाली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। लाल बहादुर शास्त्री का सार्वजनिक जीवन सादगी, ईमानदारी, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के लिए जाना जाता है। ऐसे में फतेहपुर से उनके परिवार का दशकों पुराना जुड़ाव स्थानीय राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है। सियासत के दौर बदले, चुनावी समीकरण बदले, लेकिन रिश्तों की डोर बनी रही। यही शास्त्री परिवार और फतेहपुर के बीच लंबे समय से कायम उस आत्मीय संबंध की सबसे खास पहचान है।
फतेहपुर और शास्त्री परिवार के रिश्ते की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ज्येष्ठ पुत्र स्वर्गीय हरिकृष्ण शास्त्री से हुई, जिन्हें स्थानीय लोग आत्मीयता से ‘हरी भैया’ के नाम से जानते थे। हरिकृष्ण शास्त्री फतेहपुर से सांसद निर्वाचित हुए और बाद में केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। सांसद के रूप में उनका क्षेत्र से सीधा जुड़ाव रहा और लोगों के साथ संवाद उनकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। यही वजह रही कि उनका संबंध फतेहपुर के लोगों से केवल जनप्रतिनिधि और मतदाता का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आत्मीयता का भी बन गया। हरी भैया के निधन के बाद भी फतेहपुर से शास्त्री परिवार का रिश्ता खत्म नहीं हुआ। उनकी पत्नी स्वर्गीय विभा शास्त्री से भी स्थानीय लोगों का संपर्क और आत्मीयता बनी रही। परिवार के सुख-दुख में लोगों की भागीदारी और लोगों के प्रति अपनापन इस रिश्ते को राजनीतिक दायरे से आगे ले गया। इसके बाद हरी भैया के ज्येष्ठ पुत्र विभाकर शास्त्री ने भी फतेहपुर की राजनीतिक जमीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। चुनावी राजनीति में उन्हें अपेक्षित सफलता भले नहीं मिली, लेकिन जनपद के लोगों के बीच उनके प्रति स्नेह और सहयोग का भाव बना रहा। इससे यह संदेश भी सामने आया कि चुनावी परिणाम किसी राजनीतिक यात्रा का एक पड़ाव हो सकते हैं, लेकिन वर्षों में बने सामाजिक रिश्ते उससे कहीं अधिक स्थायी होते हैं। अब शास्त्री परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में विराज शास्त्री फतेहपुर से अपने पारिवारिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं। जनसेवा, सामाजिक गतिविधियों और जनसंपर्क के माध्यम से उनका लोगों से संवाद बढ़ा है। युवाओं और स्थानीय सामाजिक समूहों के बीच उनकी सक्रियता को शास्त्री परिवार के पुराने रिश्ते को नई पीढ़ी से जोड़ने वाली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। लाल बहादुर शास्त्री का सार्वजनिक जीवन सादगी, ईमानदारी, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के लिए जाना जाता है। ऐसे में फतेहपुर से उनके परिवार का दशकों पुराना जुड़ाव स्थानीय राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है। सियासत के दौर बदले, चुनावी समीकरण बदले, लेकिन रिश्तों की डोर बनी रही। यही शास्त्री परिवार और फतेहपुर के बीच लंबे समय से कायम उस आत्मीय संबंध की सबसे खास पहचान है।