पटेल सेवा संस्थान की बैठक में छह प्रस्ताव पारित
फतेहपुर। पटेल सेवा संस्थान में कथित अनियमितताओं और चुनाव प्रक्रिया को लेकर शनिवार को सर्वसाधारण की बैठक हुई। दोपहर दो बजे शुरू हुई बैठक में संस्थान की सदस्यता, आय-व्यय और चुनाव व्यवस्था पर चर्चा की गई। बैठक में छह प्रस्ताव पारित कर पारदर्शी चुनाव कराने और कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई।
बैठक में बुद्धि-शुद्धि सत्याग्रह के आंदोलनकारी मुकेशभाई पटेल, अधिवक्ता पूजा सचान और आस्था पटेल ने अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत किए। इस दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से अब तक संस्थान के प्रमुख पदों पर एक ही समूह का नियंत्रण बना हुआ है। वक्ताओं ने पिछले तीन चुनावों की वैधता पर भी सवाल उठाए और उन्हें संस्था के संविधान के विपरीत बताया। बैठक में ढाई हजार से अधिक लोगों से 200 रुपये सदस्यता शुल्क लेने के बावजूद सदस्यता नहीं देने, आय-व्यय में लाखों रुपये की कथित गड़बड़ी और दिवंगत सदस्यों को अभिलेखों में जीवित दर्शाने के आरोप भी लगाए गए। बैठक में पारित प्रस्तावों के माध्यम से कथित रूप से संविधान के विपरीत हुए तीन चुनावों को अवैध घोषित करने, सदस्यता शुल्क जमा करने वाले लोगों को आजीवन सदस्य बनाने और संस्थान का आय-व्यय सार्वजनिक करने की मांग की गई। इसके अलावा ओमनी नर्सिंग होम से प्राप्त किराये, सदस्यता शुल्क, साहूजी महाराज की प्रतिमा के लिए एकत्र चंदे और सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों से प्राप्त धनराशि का हिसाब प्रस्तुत करने की मांग उठाई गई। अन्य प्रस्तावों में संबंधित पदाधिकारी से समाज के समक्ष माफी मांगने, संस्थान के शिलापट्टों पर वैधानिक अध्यक्ष और सचिव के नाम अंकित कराने तथा उत्तरी द्वार का नाम बदलकर बाबू दीपनारायण सिंह या संस्थापक अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र सिंह के नाम पर रखने का सुझाव दिया गया। एक अन्य प्रस्ताव में आवश्यक सुधार और पारदर्शी चुनाव होने तक अधिवक्ता सुनील उमराव की कार्यकारिणी से कार्य एवं दायित्वों का निर्वहन जारी रखने की मांग की गई। बैठक में सभी छह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।