निदिया न आवे राम, चिंता अपार हो, बिटिया सयानी जेकर रहि जायं कुंवार हो
रामलीला के प्रसंग के अनुसार, राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर में शर्त रखी थी कि जो वीर भगवान शिव के विशाल धनुष को तोड़ेगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में देश-देशांतर से आए अनेक राजा-महाराजा धनुष को तोड़ना तो दूर, उसे हिला तक नहीं सके। इससे राजा जनक निराश हो उठे और अपनी पुत्री के विवाह को लेकर चिंता व्यक्त करने लगे।
जनक के विलाप ने दर्शकों को किया भावुकधनुष को कोई भी राजा नहीं तोड़ सका तो राजा जनक का धैर्य जवाब देने लगा। उन्होंने निराश होकर कहा कि क्या पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है? पुत्री के विवाह की चिंता में व्याकुल जनक का विलाप देखकर दर्शक भावुक हो उठे। गोपाल सिंह ने अपने अभिनय के माध्यम से उस पिता की पीड़ा को जीवंत कर दिया, जो अपनी बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित रहता है।
विश्वामित्र की आज्ञा पर राम ने भंग किया धनुषराजा जनक की व्यथा सुनकर मुनिवर विश्वामित्र ने भगवान राम को शिव धनुष भंग करने का आदेश दिया। उधर, सीता और उनकी माता सुनयना भी चिंतित थीं। उन्हें आशंका थी कि जिस धनुष को बड़े-बड़े पराक्रमी राजा नहीं तोड़ सके, उसे किशोर अवस्था के राम कैसे तोड़ेंगे। लेकिन गुरु की आज्ञा पाकर भगवान राम ने शिव धनुष भंग कर दिया। इसके साथ ही मिथिला नगरी में हर्ष और उल्लास छा गया।
कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने सराहारामलीला के इस प्रसंग में कलाकारों ने बेटी के विवाह को लेकर पिता की चिंता और भावनात्मक संघर्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। राजा जनक के रूप में गोपाल सिंह, राम की भूमिका में विशाल कुमार प्रजापति, सीता की भूमिका में अनिकेत गुप्ता तथा मुनिवर विश्वामित्र की भूमिका में बीरेंद्र सिंह उर्फ दरोगा सिंह ने अभिनय किया। कलाकारों के सजीव मंचन को दर्शकों ने सराहा।