भगवान राम लड़े न होते तो रावण सीता को कभी वापस न करता, अब ग्रामीण याचना नहीं रण करेंगे
मीरजापुर (अमरेश चंद्र पाण्डेय/ अभय त्रिपाठी)। प्रकृति का सिद्धांत है कि अपना हक मांगने से नहीं मिलता, उसे छीनना पड़ता है। भगवान राम भी अगर लड़े न होते तो रावण सीता को कभी वापस न करता। धर्मयुद्ध में अपने हक के लिए उन्हें लड़ना ही पड़ा। कुछ ऐसी ही स्थिति दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के सामने खड़ी हो गई है। ग्रामीण हाथ-पैर जोड़ कर गुहार पर गुहार लगाकर थक गए, किंतु जिला प्रशासन व अन्य जिम्मेदारों की कुंभकर्णी नींद अभी तक नहीं टूटी। विवश होकर ग्रामीण अब धरना-प्रदर्शन का मन बना रहे हैं।
दरअसल मुगलसराय व प्रयागराज के बीच एक नई रेल लाइन निकल रही है, जिसके लिए बेलवन गांव में रेलवे पुल के निर्माण व रेल लाइन की बाउंड्री हेतु सीमेंट के पिलर आदि बनाने के लिए दो प्लांट लगे हैं। ये प्लांट गांवों और ग्रामीणों को दो तरह से भयंकर नुकसान पहुंचा रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
प्रथम यह कि लोक निर्माण विभाग की प्रांतीय सड़कें माल 14-15 टन क्षमता के भार परिवहन के लिए बनी हैं, जबकि रेलवे प्लांट की गाड़ियां 60-65 टन का भार लेकर दिन में दर्जनों बार चक्कर लगाती हैं। परिणामस्वरूप पड़री से चंडिका धाम तक जाने वाली सड़क का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। बड़े-बड़े गड्ढों में भरे पानी में स्कूली छात्र-छात्राएं, वृद्ध, बालक गिरते-पड़ते किसी तरह स्कूल व पड़री पहुंचते हैं। प्लांट के बड़े-बड़े ट्रेलरों से दो वर्ष के अंदर कई छात्र-छात्राएं घायल हुईं व उनकी साइकिल भी टूट चुकी हैं। लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता ने कहा कि उन्होंने कई बार मना किया, किंतु प्लांट वाले मानते ही नहीं।
अवर अभियंता को शायद यह नहीं पता कि उनके बड़े अभियंता प्लांट से मोटा नजराना लेकर यह खेल खेल रहे हैं। उन्हें गांवों और ग्रामीणों की समस्याओं से क्या मतलब? यह बता देना अनिवार्य होगा कि उक्त सड़क ग्रामीणों को हाईवे से भी जोड़ती है और राष्ट्रीय राजमार्ग से भी।
दूसरी सबसे बड़ी समस्या प्लांट की चिमनियों से निकलने वाला सीमेंट वृक्षों, फसलों व खेतों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। खेत के खेत सफेद हो गए हैं। सीमेंट की धूल से फसलें जल जा रही हैं, वृक्ष व पेड़-पौधे अपनी रंगत खोते जा रहे हैं। अजय ओझा, सारिका दुबे, राहुल तिवारी व विजय प्रताप सिंह जैसे वरिष्ठ पत्रकार निरंतर अपनी खबरों में उपरोक्त समस्याओं को उजागर करते आ रहे हैं, किंतु आश्चर्य यह कि जनपद की रहनुमा बनने वाली सांसद, एक मरीज के लिए मंडलीय अस्पताल में वीडियो बनवाकर हो-हल्ला मचाने वाली, डॉक्टरों को अपशब्द कहने वाली अनुप्रिया व उनके पति आशीष सहित अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के कानों पर जूं तक क्यों नहीं रेंग रही। यहां तो एक नहीं सैकड़ों किसानों व ग्रामीणों के जीवन-मरण का सवाल है। उनकी जीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने ललकार कर कहा है कि "मरता, क्या न करता"। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें अब किसी से उम्मीद नहीं बची है। अब वे अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे, वे सभी अपने हक के लिए अब याचना नहीं रण करेंगे।