जरूरी सामान लगातार महंगा, शक्कर की बढ़ती कीमतों से बिगड़ा रसोई का बजट; उपभोक्ताओं ने उठाए सवाल
JHANSI NEWS: महंगाई की मार से पहले ही परेशान आम आदमी को अब शक्कर के बढ़ते दामों ने एक और झटका दे दिया है। रोजमर्रा की जरूरत में शामिल शक्कर की कीमतों में बढ़ोतरी ने घरों का बजट बिगाड़ दिया है। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण के दावे तो करती है, लेकिन बाजार में जरूरी सामान की बढ़ती कीमतें इन दावों की पोल खोल रही हैं। शक्कर ऐसी वस्तु है जिसकी जरूरत लगभग हर घर में प्रतिदिन पड़ती है। चाय से लेकर मिठाई, नाश्ता और विभिन्न खाद्य पदार्थों तक इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमत बढ़ने का सीधा असर आम परिवार की जेब पर पड़ता है। सीमित आय में घर चलाने वाले परिवारों के लिए हर महीने बढ़ता किराना खर्च बड़ी चिंता बनता जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि खाद्य तेल, दाल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान पहले ही महंगे हैं। अब शक्कर के दाम बढ़ने से घरेलू बजट का संतुलन और बिगड़ गया है। लोगों का आरोप है कि बाजार में कीमतों पर प्रभावी निगरानी नहीं होने का खामियाजा सीधे उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। मुनाफाखोरी पर उठे सवाल शक्कर की कीमतों में तेजी के बीच बाजार में मुनाफाखोरी और जमाखोरी की संभावनाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं ने प्रशासन और संबंधित विभाग से बाजार की नियमित जांच कराने तथा थोक और खुदरा कीमतों के बीच अंतर की निगरानी करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि कीमतें बढ़ने का कोई ठोस कारण है तो प्रशासन को उसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। वहीं यदि किसी स्तर पर कृत्रिम रूप से दाम बढ़ाए जा रहे हैं तो ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता त्योहारों का दौर शुरू होने के साथ शक्कर की खपत भी बढ़ती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी से मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत पर भी असर पड़ सकता है। इसका अतिरिक्त बोझ अंततः आम उपभोक्ता की जेब पर ही पड़ने की आशंका है। जनता का सवाल सीधा है—जब हर महीने जरूरी सामान महंगा होता जाएगा तो आम आदमी राहत की उम्मीद किससे करे? लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शक्कर के बाजार भाव की तत्काल निगरानी कराई जाए और अनावश्यक कीमत वृद्धि अथवा जमाखोरी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए। शक्कर में आई तेजी ने आम आदमी को यही सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रोजमर्रा की जरूरतों की यह महंगाई आखिर कब थमेगी।







