Home उत्तर प्रदेश मोटे अनाज की वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

मोटे अनाज की वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

KAUSHAMBI NEWS: कृषि विज्ञान केंद्र, कौशांबी में कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्यों के लिए कृषि विभाग के प्रायोजन में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अन्न (मोटे अनाज): उत्पादन, मृदा उर्वरता प्रबंधन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर आयोजित प्रशिक्षण में किसानों को मोटे अनाज की वैज्ञानिक खेती के साथ प्रसंस्करण, जैविक उत्पादन और मूल्य संवर्धन की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को मोटे अनाज के पोषणीय महत्व और आधुनिक उत्पादन तकनीकों से परिचित कराकर उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना रहा। केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने मोटे अनाज में मृदा उर्वरता प्रबंधन विषय पर किसानों को मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रयोग, जैविक खाद और पोषक तत्वों के समुचित प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने से मोटे अनाज की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। वैज्ञानिक डॉ. अमित केशरी ने मिलेट्स के अंतर्गत विभाग की ओर से संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के साथ इसके आर्थिक और पोषण संबंधी लाभों के बारे में बताया। गृह वैज्ञानिक डॉ. मीनाक्षी सक्सेना ने मोटे अनाज के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने मिलेट्स से तैयार किए जा रहे विभिन्न पौष्टिक खाद्य उत्पादों की जानकारी देते हुए बताया कि एफपीओ के माध्यम से ऐसे उत्पाद तैयार कर किसान अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित कर सकते हैं। वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह ने जैविक खेती एवं बीडी प्रिपरेशन के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने जैविक और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से खेती की लागत कम करने तथा मृदा की गुणवत्ता एवं उत्पादन क्षमता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की। प्रशिक्षण में एफपीओ सदस्यों ने मोटे अनाज के उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की विभिन्न तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।