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नायक’ फिल्म के किरदार की तरह एक्शन में सीएमओ, निजी अस्पतालों में मचा हड़कंप

स्वास्थ्य माफिया में खलबली, बिचौलियों की टूटी रही कमर
JHANSI NEWS: जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. शिशिर पुरी इन दिनों अपनी सख्त कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में हैं। निजी अस्पतालों पर लगातार निरीक्षण, छापेमारी और नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। लंबे समय से बिना मानकों के संचालित हो रहे अस्पतालों पर शिकंजा कसने के बाद शहर में उनकी कार्यशैली की तुलना फिल्म ‘नायक’ के उस किरदार से की जा रही है, जिसमें अभिनेता अनिल कपूर व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ बिना किसी दबाव के ताबड़तोड़ फैसले लेते हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से सीएमओ द्वारा लगातार निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जहां भी स्वास्थ्य विभाग के मानकों का उल्लंघन, आवश्यक सुविधाओं की कमी, दस्तावेजों में अनियमितता या मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी खामियां मिल रही हैं, वहां कार्रवाई की जा रही है। इस अभियान ने उन अस्पताल संचालकों की नींद उड़ा दी है जो वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर अस्पताल चला रहे थे। सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग की इस सख्ती से सबसे ज्यादा परेशानी उन बिचौलियों और दलालों को हो रही है, जो मरीजों को कमीशन के खेल में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाकर अपनी जेब भरने का काम करते थे। ऐसे लोगों की सक्रियता पर भी काफी हद तक असर पड़ा है। मरीजों और उनके परिजनों का मानना है कि यदि इसी तरह की कार्रवाई लगातार जारी रही तो स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और आम लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि सीएमओ की सख्ती से कुछ निजी अस्पताल संचालक खासे नाराज हैं। कहा जा रहा है कि कार्रवाई की वजह से कई अस्पतालों का कामकाज प्रभावित हुआ है और कुछ लोगों ने उनके स्थानांतरण की चर्चाएं भी शुरू कर दी हैं। हालांकि आम नागरिकों का कहना है कि यदि कोई अधिकारी नियमों के अनुसार कार्य कर रहा है और मरीजों के हित में फैसले ले रहा है तो उसे पूरा सहयोग मिलना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि निजी अस्पतालों का संचालन तय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है। मरीजों की जान से जुड़ी सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी गंभीर विषय है। ऐसे में समय-समय पर निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम हैं। जनता के बीच यह संदेश भी जा रहा है कि अब स्वास्थ्य विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर उतरकर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति देख रहा है। यही कारण है कि आम लोगों में यह उम्मीद जगी है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों का आर्थिक व मानसिक शोषण भी कम होगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीएमओ का यह अभियान आगे भी उसी गति और निष्पक्षता के साथ जारी रहेगा या नहीं। यदि कार्रवाई बिना किसी दबाव के लगातार चलती रही, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। वहीं यदि इस अभियान की रफ्तार थमी, तो फिर पुराने हालात लौटने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।