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भक्त और भगवान की महानता का प्रसंग है मां शबरी प्रसंग,अगाध आस्था ने शबरी को प्रभु श्रीराम से मिलाया : पंडित गौरंगी गौरी जी

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गया,बिहार(प्रातःकाल एक्सप्रेस) जिले के गुरारू प्रखंड स्थित गनौरी टिल्हा गांव में चल रहे श्री राम कथा के दसवें दिन मां सबरी प्रसंग श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। श्री राम स्तुति के बाद श्री रामकथा की शुरुआत हुई। अंतराष्ट्रीय कथा वाचिका पूज्या गौरांगी गौरी जी ने मां सबरी प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा , रामायण हमें सामाजिक सीख ही नहीं देती. ईश्वर आस्था और प्रेम की पूर्णता से परिचय भी कराती है. भीलनी शबरी की कथा इसका सर्वाेत्तम उदाहरण है. शबरी ने गुरु का कहा पूर्ण मनोयोग से निभाया. फलस्वरूप गुरु के कहे अनुसार शबरी के इष्ट श्रीराम सीताजी की खोज में उसी रास्ते से गुजरे जिस पर सारा जीवन शबरी आंखें लगाई रहीं।

शबरी एक भीलनी भक्त थीं. कहा जाता है कि शबरी की जब शादी होने वाली थी उस समय विवाह समारोह में कई बकरियों की बलि होने की सूचना पर वो व्यथित हो गईं. वे इतने जीवों की हत्या का पाप अपने सिर नहीं लेना चाहती थीं. उन्होंने उसी रात अपना घर छोड़ दिया और ऋषिमुनियों के आश्रम के लिए चल पड़ीं.

मातंग ऋषि ने उन्हें अपनाया और गुरुदीक्षा दी. शबरी ने अपनी गुरुभक्ति से गुरु के हृदय में स्थान बना लिया. गुरु ने उन्हें आशीर्वाद दिया और बताया कि उनके ईष्ट भगवान राम इसी मार्ग से गुजरेंगे, तुम प्रतीक्षा करना. शबरी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वह रोज आश्रम के मार्ग की सफाई करती और कंद मूल रख कर श्रीराम का इंतजार करती थी.

इस तरह अब शबरी बूढी हो गईं थीं लेकिन उन्होंने भगवान श्रीराम से मिलने की आस नहीं छोड़ी थी. उन्हें पूरा विश्वास था कि उनके गुरु ने कहा है तो उनकी वाणी जरूर सत्य होगी. भगवान राम इसी मार्ग से गुजरेंगे और उसकी मुक्ति हो जाएगी. सनातन धर्म में मंत्र सत्यम्, पूजा सत्यम्, सत्यम् देव निरंजनम्, गुरु वाक्यम् सदा सत्यम्, सत्यमेकम् परम पदम् माना जाता है.

शबरी ने पूरी उम्र श्रीराम की प्रतीक्षा की. उनकी प्रतीक्षा पूरी हुई श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण के साथ सीता की खोज करते हुए मातंग ऋषि के आश्रम पहुंचे. शबरी उन्हें पहचान लिया और उनका स्वागत किया. शबरी ने भगवान को सभी कंदमूल फल अर्पण किये लेकिन बेर अर्पण करने में उन्हें संकोच हो रहा था. उन्हें डर था कि उनके भगवान को कहीं खट्टे बेर न मिल जाँए इसलिए उन्होंने उसे चखना शुरू किया और मीठे फल श्रीराम को देने लगीं और खट्टे फल फेंकने लगीं. राम भी शबरी के बेर प्रेम से खाने लगे. लक्षमण यह देख कर अचंभित थे कि शबरी के जूठे बेर श्रीराम प्रेम से खा रहे थे. श्रीराम शबरी की सरलता पर मोहित थे. शबरी की भक्ति आज भी निश्चल प्रेम की कहानी कहती है. कहते हैं माता शबरी को उसी समय मुक्ति मिल गई.

विश्वप्रसिद्ध गौरांगी जी आगे कहती हैं राम के जीवन और आदर्शों को आत्मसात करते हुए कथा को महज सुने नही बल्कि आत्मसात करें। यह हमें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने का महत्व सिखाता है। श्रद्धालुओं के जय श्री राम –  जय श्री राम के नारे से पंडाल गूंज उठे पंडाल में कथा खत्म होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ कथावाचक पूज्या गौरांगी जी के तरफ आशीर्वाद लेने हेतु चल पड़ी। मौजूद तमाम लोग गौरी जी के साथ एक सेल्फी लेने के लिए आतुर दिखें। कार्यक्रम का आयोजन विगत 21 मई से आगामी 31 मई तक किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन राजमंगल सिंह व रंजीत सिंह के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उक्त कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्या पंडित गौरांगी गौरी जी द्वारा श्री राम कथा को सुनने हेतु हज़ारो लोग रोज शिविर में आ रहे हैं।