राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावियों को सौंपे स्वर्ण पदक; मेडल दौड़ में फिर आगे रहीं बेटियां
SIDHARTHNAGAR NEWS: शासन द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में सोमवार को दसवां दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की गरिमा को बढ़ाते हुए छात्र-छात्राओं को उपाधियां और पदक प्रदान किए। राज्यपाल, मुख्य अतिथि बीएचयू की प्रो. मधुलिका अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी और कुलपति प्रो. कविता शाह ने दीप प्रज्वलित कर और मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण कर समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘उत्कर्ष स्मारिका’ और मासिक पत्रिका ‘कनेक्ट’ का विमोचन भी किया गया, जिसके बाद छात्राओं द्वारा वंदे मातरम और विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि यह तथागत बुद्ध की पावन धरती है, जिसने पूरी दुनिया को शांति और करुणा का संदेश दिया। इस भूमि को नमन करते हुए उन्होंने पदक विजेता छात्र-छात्राओं को बधाई दी और कहा कि उपाधि केवल एक प्रमाण-पत्र नहीं है और शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ जीवन-यापन करना नहीं, बल्कि राष्ट्र का उत्थान और विकास करना है। आप सभी केवल अपने भविष्य के निर्माता नहीं हैं, बल्कि विकसित भारत के मजबूत स्तंभ हैं। जीवन में कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाएं, अपने संस्कारों को कभी न भूलें। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि आज लड़कों की तुलना में बेटियों ने अधिक मेडल प्राप्त किए हैं और वे डिग्री प्राप्त करने में भी आगे हैं, जो बदलते समाज की एक खूबसूरत तस्वीर है। राज्यपाल ने मेधावियों के माता-पिता को भी बधाई दी और कहा कि आज नारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है।
तेजी से बढ़ते विकास और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर चिंता जताते हुए कुलाधिपति ने कहा कि आने वाले समय में जल एक बड़ी समस्या बन सकता है, इसलिए सभी युवाओं को जल संचयन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार की जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और किसान सम्मान निधि जैसी कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये योजनाएं 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं और संकल्पों की कहानी हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सपने देखें और उन्हें कर्म में बदलें, ताकि वर्ष 2047 तक भारत को एक आत्मनिर्भर और विकसित देश बनाया जा सके।
मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रो. मधुलिका अग्रवाल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस तरह से किया जाना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों को नुकसान न हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के छात्र अपनी प्रतिभा से वैश्विक स्तर पर संस्थान का नाम रोशन करेंगे और काला नमक चावल की सुगंध की तरह देश-विदेश में अपनी चमक बिखेरेंगे। विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि सपने वो सार्थक होते हैं जो हमें सोने नहीं देते। आज बेटियां देश की दिशा और दशा दोनों बदल रही हैं। उन्होंने युवाओं से मन, कर्म और वचन से देश को विकसित बनाने का आह्वान किया और कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि जून 2015 में स्थापित इस विश्वविद्यालय से आज 265 महाविद्यालय संबद्ध हैं। सत्र 2025-26 की परीक्षाएं समर्थ पोर्टल के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ समय पर संपन्न कराई गईं। उन्होंने चंदन वाटिका, पद्म सरोवर के निर्माण और मिशन शक्ति-5 के तहत चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने घोषणा की कि बीएससी में सर्वाधिक अंक पाने वाले छात्र को 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए कुलाधिपति ने वर्ष 2026 की डिग्रियों और अंकपत्रों को डिजी-पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किया। इसके साथ ही राज्यपाल द्वारा नवनिर्मित बालगृह ‘किलकारी’ और दिव्यांगजन सुविधायुक्त डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी का भी लोकार्पण किया गया। दीक्षांत समारोह के दौरान स्नातक और परास्नातक के कुल 37 मेधावियों को स्वर्ण पदक व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिसमें 28 छात्राएं और 09 छात्र शामिल रहे। इसके अलावा पीएचडी धारकों को भी उपाधियां दी गईं। इस अवसर पर राज्यपाल, मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने बेसिक शिक्षा विभाग की उन बच्चियों को सम्मानित किया जिन्होंने चित्रकला, कहानी और भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। साथ ही सिद्धार्थनगर, संकट कबीरनगर और महाराजगंज जिले के लिए 700 आंगनबाड़ी किट बांटी गईं। एचपीवी टीकाकरण में उत्कृष्ट कार्य के लिए सिद्धार्थनगर के डीएम शिवशरणप्पा जीएन, एसपी डॉ. अभिषेक महाजन सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को प्रमाणपत्र सौंपे गए। गोद लिए गए गांवों के स्कूलों को 50 पुस्तकों का सेट भी दिया गया और वहां की छात्राओं ने जल संचयन पर गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद राज्यपाल ने स्वास्थ्य केंद्र पर एचपीवी टीकाकरण का भी शुभारंभ किया। सामूहिक राष्ट्रगान के पश्चात राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दसवें दीक्षांत समारोह के समापन की घोषणा की। इस भव्य समारोह में डुमरियागंज सांसद जगदम्बिका पाल, इटवा विधायक व नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय, कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही, शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा, पूर्व विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी, सीडीओ बलराम सिंह, एडीएम गौरव श्रीवास्तव, कुलसचिव दीनानाथ यादव सहित कार्यपरिषद के सदस्य व विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य उपस्थित रहे।







