Home आस्था मंगलवार को दिख सकता है मोहर्रम का चांद

मंगलवार को दिख सकता है मोहर्रम का चांद

लल्लन नाई का आलम और इस्तेक़बाल ए अज़ा के जुलूस से होगा ग़मा के महिने का आग़ाज़

सुनो परदेसीयों घर को मोहर्रम में चले आना!मोहर्रम में कहीं अपने वतन से दूर मत जाना

PRAYAGRAJ NEWS: मदीने से कर्बला अपने वतन से बे वतन होकर जंगल बीयाबान सहरा में खानदाने रिसालत के चिराग़ हज़रत इमाम हुसैन ने जो चौदह सौ साल पहले जामे शहादत नोश फ़रमाई वह आज भी शिद्दत से याद की जा रही है।यही वजहा है कि लोग अपने वतन से दूर रहकर रोज़ी रोटी की तलाश में जहां कहीं भी रहते हों और किसी अन्य मौक़ो पर अपने वतन न आ पाते हों लेकिन माहे मोहर्रम का चांद नज़र आते ही अपने वतन की मिट्टी उन्हें खींच लाती है। अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सैय्यद मोहम्मद अस्करी ने बताया की लोग देश के किसी भी कोने में या विदेश में नौकरी करते हों वह सब मोहर्रम में अपने वतन आने को साल भर इंतेज़ार करते हैं। मोहर्रम के शुरु होने में अब बहुत कम वक़्त रह गया है इमामबाड़ों में रंग रोग़न के साथ अलम के पंजों पर क़लई और पटको व फरैरों को दुरुस्त करने के साथ ताजिया बनाने वाले भी एक महिने पहले से ताजिया बनाने में लगे हुए हैं वहीं शहर की दो दर्जन से अधिक अन्जुमनें अपने नौहों की तर्ज़ निगारी के साथ लयबद्ध अदाएगी के लिए मश्क़ (प्रेक्टिस)करने में लगी हुई हैं।अस्करी ने बताया की माहे मोहर्रम के चांद नज़र आते ही मजलिस मातम और जुलूस ए अज़ा निकलने का दौर शुरू हो जाएगा वहीं इस्तेक़बाल ए अज़ा का जुलूस चांद रात को नवाब नन्हे की कोठी रानी मण्डी से निकाला जायेगा तो दूसरी ओर दरियाबाद में अन्जुमन नक़विया रजिस्टर्ड ने सरकार मीर साहब के अज़ाखाने पर रौनक सफीपुरी व मौलाना आमिरुर रिज़वी का नए कलाम से अय्याम ए अज़ा का आग़ाज़ कर दिया।इसी तरहा अन्जुमन मोहाफिज़े अज़ा क़दीम व अन्जुमन मोहाफिज़े अज़ा दरियाबाद ने भी अपने नए कलाम को मंज़रे आम पर लाने की तय्यारी कर ली।दरगाह हज़रत अब्बास में पहली बार सरताज नक़वी ने पुरदर्द नौहा पढ़ कर पुरसा पेश किया।वहीं अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया बख्शी बाज़ार ने भी तक़रीबन पांच नए कलाम को तर्ज़ निगारी के बाद प्रस्तुतिकरण को लेकर प्रैक्टिस कर ली और उसे मस्जिद क़ाज़ी साहब बख्शी बाज़ार में पहली बार लोगों के बीच साझा किया। सभी मातमी अन्जुमनों ने जहां अपने अपने शायरों से नए नौहे लिखवाने और उसे अदा करने की तय्यारी मुकम्मल कर ली हैं वहीं ओहदेदारों के साथ अहम बैठक कर यह फैसला लिया है कि पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी दो माह और आठ दिनों तक चलने वाले ग़मगीन सभी मातमी कार्यक्रम अपनें परम्परागत तरीके और परम्परागत मार्गो व स्थानों पर पूरी शान ओ शौकत और अक़ीदे के साथ सम्पन्न होंगे।