वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की उठाई मांग
JHANSI NEWS: टीईटी से जुड़े हालिया न्यायिक निर्णय पर शिक्षक समाज ने सम्मान व्यक्त करते हुए अपनी गहरी चिंता और असहमति दर्ज कराई है। शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय लागू नियमों एवं शासनादेशों के तहत चयनित शिक्षकों से वर्षों बाद टीईटी उत्तीर्ण करने की अपेक्षा करना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि टीईटी को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम पात्रता के रूप में लागू किया गया था, लेकिन देश के विभिन्न राज्यों में हजारों शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय की प्रचलित व्यवस्थाओं के अनुसार हुई थीं। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना उनके वैध अधिकारों और अपेक्षाओं के विपरीत है। शिक्षक समाज ने कहा कि संबंधित शिक्षक वर्षों से विद्यालयों में अध्यापन कर रहे हैं, लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर चुके हैं तथा उनके कार्य का मूल्यांकन विभागीय निरीक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वार्षिक आकलन के माध्यम से लगातार होता रहा है। ऐसे में उनकी योग्यता का निर्धारण केवल एक पात्रता परीक्षा के आधार पर करना उचित नहीं माना जा सकता। शिक्षक समाज ने मांग की है कि नियुक्ति के समय लागू नियमों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित रखे जाएं, सेवा में कार्यरत शिक्षकों को पूर्व प्रभाव से नई शर्तों के अधीन न किया जाए तथा अनुभव, प्रशिक्षण और कार्य निष्पादन को भी शिक्षक की योग्यता का महत्वपूर्ण आधार माना जाए। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने के लिए कार्यरत शिक्षकों के हितों की रक्षा आवश्यक है। साथ ही सरकार ऐसा समाधान निकाले जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो और वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के भविष्य पर भी कोई संकट न आए। शिक्षक समाज ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से संवेदनशीलता दिखाते हुए आवश्यक विधायी एवं नीतिगत कदम उठाने की मांग की है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में न्याय, संतुलन और स्थिरता बनी रहे। “शिक्षक सम्मानित होगा, तभी शिक्षा सशक्त होगी” का संदेश देते हुए शिक्षक समाज ने अपने हितों की रक्षा के लिए सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई है।







