नारायण बाग की बदहाली पहुंची डीएम दरबार, स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल
JHANSI NEWS: सोशल मीडिया पर प्रचारित विकास कार्यों और धरातल पर दिखाई देने वाली वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर को लेकर नारायण बाग एक बार फिर चर्चा में आ गया है। झांसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नारायण बाग के सौंदर्यीकरण और पर्यावरणीय सुधार संबंधी किए जा रहे दावों पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस संबंध में बुधवार को पर्यावरण कार्यकर्ता नरेंद्र कुशवाहा एवं पंकज रावत ने जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की जांच कराने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि वे बिना किसी पूर्व सूचना और बिना मास्क लगाए नारायण बाग का औचक निरीक्षण करें, ताकि वहां की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति कुछ समय तक वहां बिना मास्क के खड़ा रहे तो खुले नालों से उठने वाली दुर्गंध और प्रदूषण की गंभीरता को सहज रूप से महसूस कर सकता है।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि झांसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा नारायण बाग के विकास एवं नाले की कवरिंग को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से किए गए विकास कार्यों के बावजूद बाग के आसपास खुले और बदबूदार नाले बह रहे हैं। नवनिर्मित पाथवे के किनारे जमा कचरा और प्लास्टिक अपशिष्ट क्षेत्र की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं तथा आने वाले लोगों के लिए असुविधा का कारण बन रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शहर का दूषित पानी लगातार बाग क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है, जिससे यहां की प्राकृतिक पारिस्थितिकी और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं के अनुसार, कभी अपनी विशिष्ट वनस्पतियों और हरियाली के लिए प्रसिद्ध रहा नारायण बाग अब प्रदूषण और अव्यवस्थित विकास कार्यों की मार झेल रहा है। उनका दावा है कि लगभग 200 वर्ष पुराने ऐतिहासिक ‘केवड़ा बाग’ का बड़ा हिस्सा समाप्त कर उसकी जगह कंक्रीट आधारित संरचनाएं और पाथवे विकसित किए गए हैं, जिससे बाग की मूल पहचान प्रभावित हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने शिकायतकर्ताओं को आश्वस्त किया कि वह शीघ्र ही स्वयं स्थल का निरीक्षण करेंगे तथा नगर निगम की आगामी बैठक में इस विषय को प्रमुखता से उठाया जाएगा। जिलाधिकारी के इस आश्वासन के बाद स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों में उम्मीद जगी है कि ऐतिहासिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण इस धरोहर की वास्तविक स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य शहर की विरासत, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना होना चाहिए। यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मूलभूत समस्याएं बरकरार हैं तो संबंधित परियोजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी के प्रस्तावित निरीक्षण और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।







